हिमोग्लोबिनोपैथी की रोकथाम अब झारखंड में होगी, प्रभावितों को आपस में विवाह नहीं करने की सलाह
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Apr 2018 6:33 AM (IST)
विज्ञापन

रांची : झारखंड सरकार हिमोग्लोबिनोपैथी नियंत्रण कार्यक्रम आरंभ करने जा रही है. यह एक नयी योजना है. जिसके तहत झारखंड के सभी 21 जिलों में 21 लाख प्रभावित लोगों की जांच की जायेगी. विभाग द्वारा आरंभ में रांची, देवघर और पूर्वी सिंहभूम में कार्यक्रम आरंभ किया जायेगा. इसके बाद शेष सभी जिलों में किया जायेगा. […]
विज्ञापन
रांची : झारखंड सरकार हिमोग्लोबिनोपैथी नियंत्रण कार्यक्रम आरंभ करने जा रही है. यह एक नयी योजना है. जिसके तहत झारखंड के सभी 21 जिलों में 21 लाख प्रभावित लोगों की जांच की जायेगी. विभाग द्वारा आरंभ में रांची, देवघर और पूर्वी सिंहभूम में कार्यक्रम आरंभ किया जायेगा.
इसके बाद शेष सभी जिलों में किया जायेगा. हिमोग्लोबिनोपैथी के तहत सिकल सेल एनिमिया और थैलेसिमिया की रोकथाम पर सरकार 18 करोड़ रुपये खर्च करेगी. स्वास्थ्य विभाग ने राशि स्वीकृत करने से संबंधित आदेश जारी कर दिया है. विभाग द्वारा जारी स्वीकृति आदेश में लिखा गया है कि हिमोग्लोबिनोपैथी (सिकल सेल एनिमिया एवं थैलेसिमिया) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है. इसकी रोकथाम के लिए नयी योजना आरंभ की गयी है.
इस रोग के कारण राज्य के लाखों परिवार भावनात्मक, मानसिक एवं आर्थिक दुष्प्रभाव से पीड़ित हैं. यह नियंत्रित किये जाने वाला वंशानुगत रोग है. जानकारी तथा समुचित एवं प्रभावी नियंत्रण कार्यक्रम के अभाव में अनेक बच्चे रक्त जनित रोग के साथ जन्म ले रहे हैं तथा जन्म के उपरांत जल्द ही या तो मृत्यु को प्राप्त होते हैं या इस बीमारी के दुष्प्रभाव को झेलते रहते हैं.
आंकड़ों के अनुसार बीटा थैलेसिमिया 2.9 से 4.6 प्रतिशत जनसंख्या को प्रभावित करता है, सिकल सेल एनिमिया आदिवासी बाहुल्य आबादी को पांच से 40 प्रतिशत तक प्रभावित करता है तथा एचबीइ वैरियेंट पूर्वी भारत में तीन से पांच प्रतिशत अाबादी को प्रभावित करता है.
आपस में विवाह न करने की सलाह
विभाग द्वारा बताया गया है कि हिमोग्लोबिनो लाल रक्त कण की बीमारी है, जो मलेरिया प्रभावित बाहुल्य समाज में काफी संख्या में पायी जाती है. यह रोग माता-पिता से उनके बच्चों में आता है. अत: प्रभावित वाहक या रोग ग्रसित व्यक्ति को आपस में विवाह नहीं करने की सलाह दी जा सकती है.
इससे इस रोग के फैलाव को रोका जा सकता है. हिमोग्लोबिनोपैथी के रोगी की पहचान कर उपचार किया जा सकता है. जिससे मरीज लगभग सामान्य जीवन जी सकता है. बताया गया कि हिमोग्लोबिनोपैथी रोग फैलाव का कारण माता-पिता में से एक सिकल सेल रोग का कैरियर होता है, तो दूसरा थैलेसिमिया या एचबीइ का कैरियर होता है.
ऐसे में रोग प्रभावित दो लोगों की आपस में शादी होने पर 25 प्रतिशत बच्चे रोग से एवं 50 प्रतिशत बच्चे रोग के कैरियर से ग्रसित हो जाते हैं. स्क्रीनिंग टेस्ट और एचपीएलसी टेस्ट द्वारा इसे पहचान कर चिह्नित किया जा सकता है. स्क्रीनिंग, जेनेटिक काउंसलिंग तथा प्रसव पूर्व बच्चे की जांच कर हिमोग्लोबिनोपैथी से प्रभावित होने वाले बच्चे के जन्म को रोका जा सकता है.
प्रभावितों को कार्ड दिये जायेंगे
विभाग द्वारा बनाये गये कार्यक्रम के तहत जनजातीय समुदाय के छह वर्ष के बच्चे से लेकर 21 वर्ष के युवाओं एवं गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग टेस्ट द्वारा थैलेसिमिया एवं सिकल सेल एनिमिया की पहचान की जायेगी. स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाये गये बच्चों को एचपीएलसी जांच कर कैरियर एवं रोग ग्रसित को अलग किया जायेगा.
स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाये गये बच्चों को भविष्य में रिकार्ड के लिए कार्ड वितरण किया जायेगा. इसमें आधा पीला और आधा सफेद कार्ड सिकल सेल एनिमिया एवं थैलेसिमिया वाहक के लिए तथा पूरा पीला कार्ड रोगी के लिए होगा. इसके जनजागरण के लिए स्कूल, कॉलेज, जनप्रतिनिधि, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका, समाज कल्याण विभाग एवं शिक्षा विभाग का सहयोग लिया जायेगा. जिससे एक वाहक को दूसरे वाहक से विवाह करने से रोका जा सके.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




