रांची के ब्राम्बे में बनेगा 100 बेड का प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल, इलाज की आधुनिक सुविधाएं होगी उपलब्ध
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Jan 2023 9:34 AM
स्वास्थ्य विभाग ने ब्राम्बे में 100 बेड के प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल के निर्माण की मंजूरी दे दी है. भवन निर्माण विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. प्री-फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई की जायेगी. यहां पीएसए प्लांट भी लगाया जायेगा.
रांची, बिपिन सिंह : स्वास्थ्य विभाग ने ब्राम्बे में 100 बेड के प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल के निर्माण की मंजूरी दे दी है. भवन निर्माण विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. टीम ने स्थल निरीक्षण के बाद मिट्टी जांच भी कर ली है. ड्राॅइंग अप्रूवल प्रोसेस में है. टेंडर के हिसाब से निर्माण प्रक्रिया चल रही है. यहां आसपास के मरीजों का तो इलाज होगा ही. साथ ही इसका इस्तेमाल इमरजेंसी और महामारी के समय जब भी सरकार को लगेगा कि रिम्स, सदर या ऐसे दूसरे अस्पतालों में बेड फुल हो गया है, तो यहां मरीजों को लाया जायेगा.
भवन निर्माण विभाग द्वारा रांची के साथ ही रामगढ़, जमशेदपुर, कोडरमा, लोहरदगा और हजारीबाग में इस तरह का अस्पताल तैयार किया जायेगा. अस्पताल के निर्माण में प्री-फैब्रिकेटेड मेटेरियल का उपयोग किया जायेगा. स्टेनलेस स्टील फ्रेम व जीआइ शीट से इसे तैयार किया जायेगा. शीट से ही बरामदा और वार्ड का निर्माण किया जायेगा. इसमें सीमेंट, चूना व ईंट का उपयोग नहीं किया जायेगा.
रांची सहित राज्य के कई जिलों में इस तरह के अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है. एक अस्पताल पर छह से आठ करोड़ रुपये के हिसाब से प्रोजेक्ट पर करीब 43 करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं. जिन जगहों पर स्थल का चयन पूरा कर लिया गया है, वहां टेंडर के मुताबिक छह महीने में अस्पताल तैयार हो जायेगा.
रांची में करीब दो साल पहले जब कोरोना से सर्वाधिक मौतें हो रही थीं और अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे थे, तो उसी समय सरकार की ओर से प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था.
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प्री-फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई की जायेगी. यहां पीएसए प्लांट भी लगाया जायेगा. इसके अलावा हॉस्पिटल के साथ ही वार्ड में पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था की जायेगी.
रांची सहित राज्यभर के अस्पतालों में डॉक्टर्स और पैरा मेडिकल कर्मियों की किल्लत पहले ही बनी हुई है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण रांची का सुपर स्पेशियलिटी सदर अस्पताल है. करीब 3.50 करोड़ की लागत से बना भवन बेकार पड़ा है. उपकरण भी बेकार पड़े हैं. हैंडओवर (नौ नवंबर) के 62 दिन बाद भी यहां इलाज की सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं. यहां प्रतिनियुक्ति और आउटसोर्सिंग के जरिये अतिरिक्त डॉक्टर व कर्मियों की ड्यूटी का जुगाड़ ही लगाया जा रहा है.
हॉस्पिटल में सभी प्रकार के इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. आइसीयू में अत्याधुनिक बेड, ओटू लाइन, सेक्शन लाइन, मॉनिटर्स व वेंटिलेटर हर बेड पर उपलब्ध रहेंगे. अस्पताल में एक एक्स-रे कमरा, सीटी रूम, इंटेंसिव केयर यूनिट और एक प्रयोगशाला भी होंगे.
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