रांची में बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक, बस्ती के लोगों को दिसंबर तक राहत
रांची में बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक
रांची में बस्ती खाली कराने की बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. लोगों को दिसंबर 2026 तक राहत मिली है, लेकिन पुनर्वास की मांग जारी है.
रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट
Ranchi Bulldozer Action: झारखंड की राजधानी रांची में पिछले चार-पांच दिनों से चल रही बस्ती खाली कराने की बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. कार्रवाई के दौरान कई मकानों को ध्वस्त किया गया था. स्थानीय लोगों का आरोप था कि उन्हें पर्याप्त सूचना दिए बिना उनके मकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. मामले को लेकर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा था. बताया गया कि संबंधित बस्ती में लोग करीब 60 वर्षों से भी अधिक समय से रह रहे हैं. यह जमीन एचईसी की बतायी जा रही है और एचईसी की ओर से जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जा रही थी. पिछले कई दिनों से लगातार बुलडोजर चलने के कारण बड़ी संख्या में लोग सड़क पर आ गए थे.
कई मकान तोड़े गए, सामान निकालने का भी नहीं मिला समय
स्थानीय लोगों का कहना था कि कार्रवाई के दौरान कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने घरों से सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया. इस कार्रवाई के विरोध में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में लगातार प्रदर्शन भी किया जा रहा था.
मामले को लेकर मीडिया में लगातार खबरें सामने आने के बाद भी प्रभावित लोगों को तत्काल राहत नहीं मिलने का आरोप लगाया गया. इसके बाद बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया.
हाईकोर्ट में गरीबों की ओर से बिना फीस लड़ी लड़ाई
वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी ने बताया कि बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की पहल पर मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई. उन्होंने बताया कि अधिवक्ता इंद्रजीत समेत दो अधिवक्ताओं ने गरीब लोगों की ओर से बिना फीस लिए अदालत में पक्ष रखा.
पार्षद के मुताबिक, हाईकोर्ट ने फिलहाल दिसंबर 2026 तक बस्ती खाली कराने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. इस अवधि के दौरान प्रभावित लोगों को अपना मकान खाली करने की व्यवस्था करनी होगी.
बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने जताया आभार
बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक मिंटू पासवान ने हाईकोर्ट के प्रति आभार जताते हुए मीडिया का भी धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से यहां रह रहे लोगों को अदालत से राहत मिली है. समिति की मांग है कि जिन लोगों को अस्थायी रूप से बस्ती से हटाया जा रहा है, उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए.
समिति का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल बस्ती बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक तरीके से पुनर्वास और मकान दिलाने की भी है.
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आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई पर विराम लगा है. अब प्रभावित परिवारों की नजर इस बात पर है कि उन्हें वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की क्या व्यवस्था मिलती है. वहीं, बस्ती बचाओ संघर्ष समिति आगे भी पुनर्वास की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रही है.
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