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..सोबरन सोरेन की हत्या का कारण बना महाजनी एवं सूदखोरी के खिलाफ आंदोलन

Updated at : 17 Nov 2025 6:20 PM (IST)
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..सोबरन सोरेन की हत्या का कारण बना महाजनी एवं सूदखोरी के खिलाफ आंदोलन

रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा गांव के लुकैयाटांड़ मैदान में शहीद सोबरन सोरेन की शहीद स्थल पर शहादत दिवस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है.

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सोबरन सोरेन: जिनकी शहादत ने इतिहास रचा फोटो फाइल गोला-1- लुकैयाटांड के शहीद स्थल पर स्व सोबरन सोरेन का स्थापित आदमकद प्रतिमा. फोटो फाइल : गोला 02: शहीद स्थल राज कुमार सोबरन मांझी शहादत दिवस 27 नवंबर गोला. रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा गांव के लुकैयाटांड़ मैदान में शहीद सोबरन सोरेन की शहीद स्थल पर शहादत दिवस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है. 27 नवंबर को कार्यक्रम होना है. इसकी तैयारी जोरों से की जा रही है. शिबू सोरेन के पिता स्व सोबरन सोरेन झारखंड आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत थे. सोबरन सोरेन एक शिक्षक थे. उन्हें अपने इलाके के गिने-चुने पढ़े-लिखे आदिवासी शख्सियतों में गिना जाता था. वह एक आदिवासी कार्यकर्ता और गांधीवादी व्यक्ति थे. उन्होंने अपने समुदाय के लिए काम किया. महाजनी प्रथा, सूदखोरी और शराबबंदी जैसे सामाजिक शोषण के खिलाफ आदिवासी जागरूकता अभियान चलाया. शिबू सोरेन के दादाजी चरण मांझी रामगढ़ राजा के टैक्स तहसीलदार थे. जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक-ठाक थी. उनका मुख्य संघर्ष महाजनों और सूदखोरों के खिलाफ था. जो आदिवासियों को कर्ज के जाल में फंसाकर उनकी जमीनें छीन लेते थे. सोबरन सोरेन ने आदिवासियों को शिक्षित करने और शोषण के खिलाफ खड़ा करने का बीड़ा उठाया था. वह 27 नवंबर 1957 को अपने दो बेटे राजाराम सोरेन और शिबू सोरेन से मिलने के लिए नेमरा गांव से गोला स्थित स्कूल हॉस्टल जा रहे थे. इस बीच रास्ते में ही लुकैयाटांड़ बरलंगा के पास महाजनों के द्वारा उनकी हत्या कर दी गयी थी. जिसके स्मृति में प्रतिवर्ष 27 नवंबर को लुकैयाटांड में स्व सोबरन सोरेन का शहादत दिवस मनाया जाता है. साथ ही पिछले तीन वर्षों से शहीद स्थल के पास मेला भी लगाया जाता है. पिता की हत्या के बाद शिबू सोरेन के जीवन में बदलाव बताया जाता है कि उस समय शिबू सोरेन केवल 13 से 15 वर्ष के थे और स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे. पिता की हत्या की घटना ने शिबू सोरेन के जीवन की दिशा पूरी तरह से बदल दी. इसके बाद उनका पढ़ाई से मन टूट गया और उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया. उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन (जैसे धान कटाई आंदोलन) शुरू करने के लिए प्रेरित किया. जो बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना और झारखंड राज्य के आंदोलन का आधार बना. शिबू सोरेन के जीवन पर उनके पिता की हत्या का गहरा असर पड़ा, जिसने उन्हें आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष करने वाला महान नेता बना दिया. शहीद स्थल को किया गया विकसित लुकैयाटांड़ स्थित शहीद स्थल को विकसित करने को लेकर कई कदम उठाये गये हैं. यहां पर स्व सोबरन सोरेन का आदमकद प्रतिमा स्थापित किया गया है. साथ ही यहां पानी का फुवारा, स्ट्रीट लाइट, सोलर जल मीनार, परिसर में पेवर ब्लॉक भी लगाया गया है. साथ ही स्व सोरेन एवं उनकी पत्नी सोना सोरेन की याद में सोना-सोबरन सोरेन उच्च विद्यालय की स्थापना की गयी है. जिसका भवन निर्माण लाखों की लागत से किया गया है. इतना ही नहीं यहां पर हैलीपैड एवं कार्यक्रम स्थल भी बनाया गया है. जो लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र है. ✨

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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