पल भर में उजड़ गया रजरप्पा का बाजार, दुकानों की कतारें मलबे में तब्दील

पल भर में उजड़ गया रजरप्पा का बाजार, दुकानों की कतारें मलबे में तब्दील
पुलिस की इस कार्रवाई से हर कोई स्तब्ध था, पुलिस छावनी में तब्दील था मंदिर परिसर. रजरप्पा. रजरप्पा मंदिर प्रक्षेत्र में गुरुवार को वह दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया. रामगढ़ जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की. कुछ ही घंटों में वर्षों से सजी दुकानों की लंबी कतार जेसीबी और बुलडोजर की गूंज के बीच मलबे में तब्दील हो गयी. देखते ही देखते पूरा बाजार उजड़ गया. मंदिर परिसर में संचालित 254 दुकानों को चिह्नित कर ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान पूरा मंदिर परिसर पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया. इस अभियान का नेतृत्व रामगढ़ एसडीओ अनुराग तिवारी और हेडक्वार्टर डीएसपी चंदन वत्स ने किया. उनके साथ एलआरडीसी दीप्ति प्रियंका कुजूर, चितरपुर सीओ दीपक मिंज, मांडू सीओ तृप्ति विजया कुजूर, दुलमी सीओ किशोरी यादव, गोला सीओ सीताराम महतो, रामगढ़ सीओ रमेश रविदास, पतरातू सीओ मनोज कुमार चौरसिया सहित 39 दंडाधिकारी और रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में पुलिस के जवान मौजूद थे. लाइव @ रजरप्पा : मिनट-दर-मिनट बदलता गया नजारा सुबह 8:30 बजे चितरपुर अंचल के अधिकारी और कर्मी मंदिर परिसर पहुंचने लगे थे. सुबह 9:00 बजे 13 स्थानों पर 39 दंडाधिकारी तैनात हो गये. सुरक्षा घेरा सख्त हो गया. सुबह 10:00 बजे जेसीबी और बुलडोजर ने अभियान शुरू कर दिया. इससे दुकानदारों में बेचैनी बढ़ गयी. 11:45 बजे भैरवी नदी के किनारे की दुकानों को लेकर लोगों में उम्मीद जगी थी. 12:40 बजे देखते ही देखते सभी दुकानें मलबे में तब्दील हो गयी. इससे चारों ओर सन्नाटा पसर गया. पूरी प्रक्रिया के बाद हुई कार्रवाई : एसडीओ रामगढ़ एसडीओ अनुराग तिवारी ने बताया कि चितरपुर सीओ ने पहले ही अतिक्रमण में आने वाली 254 दुकानों को चिह्नित कर नोटिस दिया गया था. सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही यह कार्रवाई की गयी है. उन्होंने बताया कि अधिकांश दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें खाली कर दी थीं. दुकानदारों की आंखों में थे आंसू और चेहरे पर मायूसी कार्रवाई के दौरान सबसे भावुक दृश्य उन दुकानदारों का था, जिनकी सालों की मेहनत कुछ ही घंटों में मलबे में बदल गयी. कई दुकानदारों की आंखें नम थीं, तो कुछ अपने टूटे आशियाने को देख कर खुद को संभाल नहीं पा रहे थे. दशकों से इस बाजार से जुड़े लोग अचानक बेघर और बेरोजगार जैसे हालात में पहुंच गये. दुकानदारों की आजीविका को लेकर खड़ा हुआ सवाल : अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद सबसे बड़ा सवाल दुकानदारों की आजीविका को लेकर है. रजरप्पा मंदिर परिसर सर्वांगीण विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष कुलदीप साव ने कहा कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी छिन गयी है. उन्होंने प्रशासन से प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है. अरूप कुमार पंडा ने बताया कि 39 दुकानदारों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें एक माह के भीतर पुनर्वास का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा कि अन्य दुकानदार भी जल्द ही कानूनी प्रक्रिया अपनायेंगे. रोहित साहू ने कहा कि हमारे पूर्वज 40 वर्षों से यहां दुकान चला रहे थे. इसी से परिवार चलता था, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया.
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