लोकगीतों की धुन और मांदर की थाप पर रातभर झूमता रहा कोयलांचल
नृत्य करती बहनें. | Prabhat Khabar Network
भुरकुंडा में करमा महापर्व धूमधाम से मनाया गया. मांदर की थाप और झूमर गीतों के बीच बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा.
भुरकुंडा. भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति पूजा का महापर्व करमा मंगलवार को कोयलांचल भुरकुंडा सहित बासल क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया. भुरकुंडा, भदानीनगर और बासल थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव-टोला के अखरा में देर रात तक मांदर की थाप और झूमर गीतों की गूंज सुनाई देती रही. पर्व की शुरुआत सुबह जावा उठाने के साथ हुई.
अखरा में सर्वप्रथम कुंवारी कन्याएं टोकरी में मकई, मडुआ, धान, गेहूं का जावा लेकर पहुंचीं. इसके बाद अखरा के बीचो-बीच करम डाइर गाड़कर पूजा-पाठ का कार्यक्रम शुरू हुआ. निर्जला व्रत रखी बहनें मांदर की थाप पर थिरकते हुए करम डाली की परिक्रमा कर रही थीं. इस दौरान सभी इति-इति जावा किया इति-इति जैसे पारंपरिक गीत गुनगुनाते हुए अपने भाई की लंबी उम्र की कामना कर रही थीं.
मौके पर पूजा संपन्न करा रहे पाहन ने बताया कि भादो एकादशी को कुंवारी कन्याओं द्वारा लाए गए जावा से समस्त जीव-जंतु, पेड़-पौधा और अच्छी कृषि के लिए गोवारी की जाती है. विधिवत पूजा के समापन के बाद सखुआ पत्ता के दोने में प्रसाद का वितरण किया गया और फिर देर रात तक नाच-गान का दौर चलता रहा. इस अवसर पर विधायक रोशनलाल चौधरी ने कहा कि करमा पर्व आपसी भाईचारगी और सौहार्द का संदेश देता है.
यह पर्व झारखंड की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है. क्षेत्र के रिवरसाइड, बिरसा नगर बस्ती, सेंट्रल सौंदा, सीसीएल सौंदा, सौंदा डी, सौंदा बस्ती, सुंदर नगर, पटेल नगर, जवाहर नगर, बलकुदरा, गेगदा, जराद, हरिहरपुर, रसदा आदि गांवों में पर्व को लेकर खास उत्साह देखा गया.
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