पतरातू के हेसला में हाईकोर्ट के फैसले पर रैयतों ने बांटी मिठाई, बोले- 60 साल बाद जीता संघर्ष, सिर्फ 12.59 एकड़ ही हुई थी अधिग्रहित

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एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाते पंचायतवासी | Prabhat Khabar Network

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झारखंड हाईकोर्ट के एक अहम फैसले से पतरातू के रैयतों को बड़ी राहत मिली है. वर्षों के संघर्ष के बाद, उन्होंने इसे अपनी जीत बताया है और अब सिर्फ 12.59 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बात कही जा रही है.

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पतरातू. झारखंड हाईकोर्ट के 31 अगस्त 2026 के फैसले के बाद रविवार को हेसला पंचायत भवन में रैयतों के नेता प्रदीप महतो की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. हेसला के रैयतों ने कोर्ट के फैसले को वर्षों से चले आ रहे संघर्ष की जीत बताया. इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई. प्रदीप महतो ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से स्पष्ट हुआ है कि हेसला मौजा की सिर्फ 12.59 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ था. उनका दावा है कि बाकी जमीन मूल रैयतों की है.

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जमीन बिना विधिवत अधिग्रहण के कब्जे में ली गई

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती बिहार सरकार के समय पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस) की स्थापना के लिए ग्रामीणों की जमीन बिना विधिवत अधिग्रहण के कब्जे में ली गई. इससे कई लोगों को विस्थापन और पलायन का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि 1960-61 में पीटीपीएस की स्थापना के दौरान आदिवासी-मूलवासी ग्रामीणों को उनकी जमीन से बेदखल किया गया.

प्रशासन की मौजूदगी में ग्रामीणों के घरों पर चलाया बुलडोजर

प्रदीप महतो के अनुसार, बाद में हेसला गांव की जमीन झारखंड सरकार ने जियाडा को हस्तांतरित कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ग्रामीणों की जमीन और घरों पर बुलडोजर चलाया गया. ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कोर्ट में मामला लंबित होने की बात कहते हुए आपत्ति भी दर्ज कराई थी.

रैयतों के साथ अन्याय की जांच की मांग

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शांतनु मिश्रा ने कहा कि झारखंड में औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना के दौरान रैयतों के साथ अन्याय की शिकायतें सामने आती रही हैं. उन्होंने कहा कि हेसला के ग्रामीणों के मामले में हाईकोर्ट का फैसला इस स्थिति को सामने लाता है. विस्थापित-प्रभावित संघर्ष मोर्चा के आदित्य नारायण प्रसाद और कुमेल उरांव ने कहा कि पीटीपीएस की स्थापना के दौरान 25 गांवों के हजारों किसान और रैयत प्रभावित हुए थे. उनका आरोप है कि कई जगह बिना जमीन अधिग्रहण के लोगों को बेदखल किया गया, जबकि कुछ मामलों में कम मुआवजे पर जबरन जमीन लेने की शिकायतें भी हैं.

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अब तक मुआवजा नहीं

उन्होंने कहा कि सैकड़ों रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है. इसके बावजूद पूर्व पीटीपीएस की जमीन पीवीयूएनएल (एनटीपीसी) और जियाडा को तथा डैम क्षेत्र के 12 गांवों की जमीन पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की गई है.

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आंदोलन की चेतावनी

मोर्चा के नेताओं ने झारखंड सरकार से पूरे मामले की विशेष जांच कराने और रैयतों को न्याय दिलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर मोर्चा व्यापक आंदोलन करेगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुखिया प्रतिनिधि वीरेंद्र झा, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुन्ना पासवान, प्रवक्ता रमेश यादव, शंकर मुंडा, यशवंत सागर समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

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