पलामू से वैश्विक मंच तक पहुंचा डॉ कौशल का वनराखी आंदोलन, विश्व पर्यावरण दिवस पर देशव्यापी उत्सव
Published by : Priya Gupta Updated At : 05 Jun 2026 8:55 AM
वृक्षों को रक्षासूत्र बांधकर संरक्षित किया
Palamu News: पलामू से शुरू हुआ डॉ कौशल किशोर जायसवाल का वनराखी आंदोलन आज वैश्विक पहचान बना चुका है. स्वर्ण जयंती वर्ष में विश्व पर्यावरण दिवस पर देशभर में उत्सव मनाया जा रहा है, जबकि उनका पर्यावरण संरक्षण अभियान नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है.
चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू की धरती से शुरू हुआ प्रख्यात पर्यावरणविद डॉ कौशल किशोर जायसवाल का ऐतिहासिक वनराखी आंदोलन इस वर्ष स्वर्ण जयंती मना रहा है. इसके उपलक्ष्य में विश्व पर्यावरण दिवस पर देशव्यापी समारोह श्रृंखला आयोजित की जा रही है. वर्ष 1966 के भीषण अकाल से प्रेरणा लेकर डॉ कौशल ने पांच दशकों में एक व्यक्ति के संकल्प को वैश्विक जन-आंदोलन में बदल दिया है. उन्होंने अब तक देश के 26 राज्यों और 10 से अधिक देशों में 59 लाख से अधिक पौधों का निःशुल्क वितरण-रोपण किया है, जबकि 26 लाख से अधिक वृक्षों को रक्षासूत्र बांधकर संरक्षित किया है. डॉ कौशल का यह अभियान सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है. उन्होंने पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर किसानों को वृक्ष खेती की अनूठी अवधारणा सिखाई और पेड़ों को किसानों का फिक्स्ड डिपॉजिट बताया, जो बाढ़ या सूखे जैसी विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा चक्र प्रदान करते हैं. उनकी इसी दूरदर्शिता और पर्यावरणीय योगदान के कारण उनकी जीवनी को सीबीएसइ बोर्ड की कक्षा आठ और आइसीएसइ बोर्ड की कक्षा छह के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. उन्हें अब तक 10 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों सहित कुल 80 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है
पलामू में स्थापित हुआ दुनिया का पहला वृक्ष देव मंदिर
डॉ कौशल ने पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ते हुए पलामू के छतरपुर अनुमंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत डाली में दुनिया का पहला पर्यावरण धर्म ज्ञान वृक्ष देव मंदिर स्थापित किया है. इस वर्ष 12 फरवरी को अमेरिकी शोधकर्ता जॉर्ज जेम्स और अप्पिको आंदोलन के प्रणेता पांडुरंग हेगड़े की उपस्थिति में उद्घाटित इस मंदिर में जीवित वृक्ष ही पूजे जाते हैं. डाली का यह बंजर क्षेत्र आज मोहनलाल खुर्जा-पार्वती देवी पार्क के रूप में विकसित हो चुका है, जहां 22 देशों की 200 से अधिक दुर्लभ और औषधीय प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं.
उपहास से लेकर जन-आंदोलन बनने का सफर
शुरुआती दौर में जब डॉ कौशल अपनी गाड़ी में पौधे लेकर गांव-गांव घूमते थे, तब समाज उन्हें पागल कहकर उपहास उड़ाता था. हालांकि, कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट ने दुनिया को उनके दशकों पुराने संदेश की अहमियत समझा दी. डॉ कौशल का मानना है कि आकाश में सूर्य देव और धरती पर वृक्ष देव ही जीवन के असली आधार हैं.एक अकेले व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति से शुरू हुआ यह आंदोलन आज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति संरक्षण की सबसे बड़ी प्रेरणा बन चुका है.
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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.
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