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झारखंड खादी बोर्ड नहीं कर पा रहा काम, सदस्य मनोज सिंह ने प्रभात खबर को बतायी वजह

Updated at : 28 Nov 2022 1:32 PM (IST)
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झारखंड खादी बोर्ड नहीं कर पा रहा काम, सदस्य मनोज सिंह ने प्रभात खबर को बतायी वजह

पलामू से ताल्लुक रखने वाले मनोज सिंह दूसरी बार खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्वी क्षेत्र के सदस्य मनोनीत हुए हैं. उन्होंने झारखंड खादी बोर्ड की स्थिति, उसके कार्यकलाप पर उन्होंने विस्तार से बात की. पढ‍़ें प्रभात खबर के सैकत चटर्जी की बातचीत

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सवाल : आयोग कैसे काम करता है? 

जवाब : आयोग सीधे तौर पर कोई काम नहीं करता है. देश के करीब 33 राज्यों में खादी बोर्ड है. करीब 3000 से अधिक ऐसी संस्थाएं हैं, जो खादी के क्षेत्र में काम करती हैं. खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग इन्ही बोर्ड और संस्थाओं के माध्यम से काम करता है. इसके अलावा आयोग राज्य में संचालित खादी बोर्ड को मान्यता से संबंधित प्रमाण पत्र जारी करता है.

सवाल : आयोग का मुख्य काम क्या है? 

जवाब : खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग मुख्य रूप से कटिन व बुनकरों के लिए अधिक से अधिक रोजगार सृजन के मार्ग खोलता है. उनके हित के लिए काम करता है. इसके अलावा अपने सहयोगी बोर्ड व संस्थाओं के माध्यम से आयोग खादी को बढ़ावा मिले ऐसी योजनाओं को मूर्त रूप देने, ग्रामीण या छोटे शहरी इलाके में कुटीर उद्योग व  सूक्ष्म उद्योग खड़ा करने, पारम्परिक उद्योग के लिए कलस्टर डेवलेप करने का काम करता है. इनमें मोची का काम, कुम्हार सशक्तिकरण, इमली प्रसंस्करण, मधुमक्खी पालन जैसे काम आते हैं.

सवाल : सदस्यों की कार्य प्रणाली के बारे बताएं? 

जवाब : खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग को छह जोन में बांटा गया है. हर जोन से एक-एक सदस्य मनोनीत किये जाते हैं. इसके अलावा कुछ तकनीकी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें विज्ञान, व्यापार, टेक्नोलॉजी, ग्रामीण विकास आदि क्षेत्र से चुने जाते हैं. ये सदस्य मुंबई में आयोग के प्रधान कार्यालय में हर माह होने वाले बैठकों में भाग लेकर अपने-अपने क्षेत्र में खादी के विकास को लेकर चर्चा कर योजना बनाते हैं. नीति निर्धारण में भी इनकी भूमिका होती है. इसके साथ ही हर सदस्य अपने जोन के जोनल कमेटी के अध्यक्ष होते हैं.

सवाल : झारखंड में खादी बोर्ड की क्या स्थिति है? 

जवाब : यह दुर्भाग्य ही है कि राज्य में खादी बोर्ड स्थिर नहीं है. लंबे समय से चेयरमैन का पद रिक्त है. इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में काफी कठिनाई होती है. कार्य जो शुरू किये गए थे वे भी इसी कारण सही से हो नहीं पा रहे हैं. अपार संभावनाओं और  ग्रामीण इलाके में ग्रामोद्योग की जरुरत होने के बावजूद  ठीक से काम हो नहीं पा रहा है. एक सदस्य के रूप में झारखंड से ताल्लुक  रखने के कारण यह बहुत  ही पीड़ादायक है.

सवाल : खादी से तालुक रखने वाले  झारखंड के 14 संस्थाओं पर सीबीआई जांच हो रही है? क्या कहेंगे. 

जवाब : यह भी शर्मनाक है. इस पर जांच चल रही है, तो  कुछ कहना उचित नहीं होगा.  लेकिन झारखंड में ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो बेहतर काम की हैं. कर भी सकती हैं. जरूरत है इन्हें राज्य में उचित माहौल दिया जाये. अगर पूर्वी क्षेत्र की बात करें तो खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग वैसे जगह जहां संभावना के बावजूद काम नहीं हुए वहां काम करना चाहती है. 

सवाल : झारखंड में है खादी की मात्र 25 संस्था. संभावना कितनी है? 

जवाब : खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्वी क्षेत्र में सबसे बेहतर काम बंगाल में हो रहा है. यहां 375 से अधिक संस्थाएं खादी के क्षेत्र में अपने बोर्ड के माध्यम से खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अंतर्गत काम कर रही है. बिहार में 100 से अधिक, ओडिशा में 75 से अधिक संस्थाएं काम कर रही है. अन्य राज्यों में भी बेहतर माहौल बनाया गया है. लोगों में काफी जागरूकता आयी है. लेकिन झारखंड की बात करे तो यहाँ करीब 25 संस्था ही है जो खादी के क्षेत्र में काम करती है. झारखंड जैसे संभावना युक्त राज्य के लिए यह नाकाफी है. 

सवाल : पलामू को लेकर योजनाएं 

जवाब : प्लानिंग तो कई है पर सब एक बिन्दु पर आकर ठहर जाती है कि राज्य खादी बोर्ड क्रियाशील हो. चूंकि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग सीधे कोई काम नहीं करती है, इसलिए बोर्ड के बगैर कुछ संभव हो नहीं पा रहा है. अगर बोर्ड ठीक से काम करे तो सिर्फ पलामू ही नहीं पूरे झारखंड की खादी प्रोडक्ट विश्व पटल पर छाप छोड़ेगी

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