श्रीमद्भागवत कथामृत बहुमूल्य है : विष्णुचित्त महाराज
Published by : VIKASH NATH Updated At : 20 Feb 2026 11:07 PM
प्रखंड मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर प्राण प्रतिष्ठा सह शत चंडी महायज्ञ के प्रथम दिन यज्ञ के उपरांत संध्याकाल मे कथा वाचक विष्णुचित्त महाराज के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन सुनाया गया.
सेन्हा-लोहरदगा. प्रखंड मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर प्राण प्रतिष्ठा सह शत चंडी महायज्ञ के प्रथम दिन यज्ञ के उपरांत संध्याकाल मे कथा वाचक विष्णुचित्त महाराज के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन सुनाया गया. जिसके तहत प्रथम दिन श्रीमद्भागवत महात्म्य तथा सत्यनारायण की कथा के बारे में श्रोताओं को बतलाया गया कि सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत और सत्यनरायण की कथा नौमिसारण्य में प्रारम्भ हुआ था.स्वर्ग की अमृत से भी अधिक श्रीमद्भागवत अमृत कथा बहुमूल्य है.जिस पर 88 हजार ऋषि मुनियों के साथ सौनक ऋषि द्वारा श्री सूतजी से प्रश्न पूछे कि घोर कलीकाल कलयुग में धर्म की स्थापना कैसे होगी और धर्म नहीं रहने पुण्य फल कैसे प्राप्त होगा. इन बातों पर कथा वाचक विष्णुचित्त महाराज के द्वारा स्रोता श्रद्धालु भक्तों को धर्म के बारे में विस्तार पूर्व बताया गया.उसी क्रम में शुकदेव जी महाराज द्वारा अभिमन्यु पुत्र परीक्षित जी को श्रीमद्भागवत कथा सुनाये थे.उसको भी विस्तार पूर्वक भक्त श्रद्धालु स्रोताओं को बताया गया. बताया गया कि सभी कथाओं में सर्वश्रेष्ठ श्रीमद्भागवत कथा है. प्रवचन के दौरान कथा वाचक के द्वारा धर्म के संदर्भ में विभिन्न बातों को विस्तार पूर्वक बताया गया. श्रद्धालु भक्त स्रोतागन आनंदचित्त हो तन्मयता के साथ श्रवण कर रहे थे. मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष जोधनरायण साहू, उपाध्यक्ष अजय साहू, संतोष महतो, रामकिशोर शुक्ला, दशरथ साहू, सबिता देवी, संध्या देवी, माया देवी, प्रतिमा देवी, शीला देवी, ललिता देवी, शकुंतला देवी सहित सैकड़ों महिला पुरुष भक्त उपस्थित थे.
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