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सहनशीलता और धर्मरक्षा के प्रतीक हैं श्रीराम

Updated at : 30 May 2025 9:06 PM (IST)
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सहनशीलता और धर्मरक्षा के प्रतीक हैं श्रीराम

11 दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन शीला देवी सरस्वती विद्या मंदिर, लोहरदगा के परिसर में किया गया है

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लोहरदगा. विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के संयुक्त तत्वावधान में 11 दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन शीला देवी सरस्वती विद्या मंदिर, लोहरदगा के परिसर में किया गया है. यह कार्यक्रम 27 मई से आरंभ हो चुका है, जिसमें विहिप के 75 कार्यकर्ता तथा बजरंग दल के 300 प्रशिक्षार्थी भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम के शुभारंभ पर विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय मंत्री बीरेंद्र प्रसाद ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, श्रीराम त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति हैं. उन्होंने राज्याभिषेक की घोषणा के बाद भी पिता के वचन के लिए वनवास स्वीकार किया और भाई भरत को राज्य सौंप दिया. उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन चरित्र संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है. बीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण, धर्म रक्षा, तथा बौद्धिक एवं शारीरिक क्षमता का विकास करना है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र व समाज निर्माण में योगदान दें. कार्यक्रम को सफल बनाने में लोहरदगा जिला विहिप अध्यक्ष रितेश कुमार, जिला मंत्री रंजीत कुमार, संगठन मंत्री कार्तिक, तथा सुनील अग्रवाल, हिमांशु कुमार, आशुतोष पाठक, नितिन कांषयकर, अंकित गुप्ता, प्रशांत खत्री, और गुमला जिला मंत्री मनीष बाबू सहित अनेक व्यापारी बंधु और समाजसेवियों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ SINGH

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