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भंडरा में दीपावली की तैयारियां, मिट्टी के कारीगरों की मेहनत जारी

Updated at : 12 Oct 2025 7:44 PM (IST)
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भंडरा में दीपावली की तैयारियां, मिट्टी के कारीगरों की मेहनत जारी

भंडरा में दीपावली की तैयारियां, मिट्टी के कारीगरों की मेहनत जारी

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भंडरा़ दीपावली के साथ-साथ धनतेरस, भैया दूज, चित्रगुप्त पूजा, छठ महापर्व और कार्तिक पूर्णिमा की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. इन सभी त्योहारों में दीपक और रोशनी का विशेष महत्व है. पारंपरिक मान्यता है कि दीये जलाने से अंधकार दूर होता है और जीवन में खुशियां आती है. हालांकि आधुनिक युग में बिजली की रोशनी और प्लास्टिक के खिलौनों ने अधिक ध्यान खींचा है, फिर भी ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के दीयों की परंपरा आज भी जीवित है. भंडरा प्रखंड के भौंरो, अंबेरा, कचमची, सीठियो आदि गांवों के मिट्टी के कारीगर दिवाली से पहले दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. वे न केवल दीये, बल्कि पूजा घाट और अन्य पारंपरिक वस्तुएं भी बना रहे हैं. स्थानीय कारीगर गजेंद्र प्रजापति ने बताया कि 50 वर्षों से यह पेशा निभा रहे हैं, लेकिन बिजली की बत्तियों और मोमबत्तियों के बढ़ते चलन से मिट्टी के दीयों की मांग में कमी आयी है. कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने आजीविका चलाना कठिन कर दिया है. उन्होंने कहा कि पहले की तरह मुनाफा नहीं रह गया है, फिर भी वे इस परंपरा को जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं. दिवाली में ग्रामीण इलाकों में कई घर अभी भी मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता देते हैं. यही मांग कारीगरों को अपने सदियों पुराने शिल्प से जोड़कर रखती है. जैसे-जैसे त्योहार करीब आ रहा है, कारीगर उम्मीद कर रहे हैं कि उनके प्रयास दूसरों के जीवन में रोशनी लायेगी, भले ही उन्हें आधुनिक विकल्पों और बदलती प्राथमिकताओं का सामना करना पड़ रहा हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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