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थानों में अब मिलेगी गिरफ्तारी पूर्व कानूनी सहायता, डालसा ने अधिवक्ताओं की टीम तैनात की

Updated at : 12 Nov 2025 8:50 PM (IST)
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थानों में अब मिलेगी गिरफ्तारी पूर्व कानूनी सहायता, डालसा ने अधिवक्ताओं की टीम तैनात की

थानों में अब मिलेगी गिरफ्तारी पूर्व कानूनी सहायता, डालसा ने अधिवक्ताओं की टीम तैनात की

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लोहरदगा़ नालसा नई दिल्ली और झालसा रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) लोहरदगा के अध्यक्ष राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजेश कुमार की अध्यक्षता में एलएडीसीएस (लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम) के अधिवक्ताओं और जिले के थानों में प्रतिनियुक्त पीएलवी (पैरालीगल वॉलंटियर) के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की गयी. बैठक के दौरान डालसा सचिव ने बताया कि जिले के सभी थानों में पीएलवी की नियुक्ति की गयी है, जो थाने में आने वाले लोगों को विधिक जानकारी देकर उनकी सहायता करते हैं. झालसा के निर्देशानुसार जिले के थानों में विद्वान अधिवक्ताओं का पैनल भी तैयार किया गया है, जिन्हें अलग-अलग कार्य दिवसों में प्रतिनियुक्त किया गया है.इन विद्वान अधिवक्ताओं में एलएडीसीएस चीफ नसीम अंसारी, डिप्टी चीफ उमेश कुमार, नारायण साहू, सहायक भूपेंद्र कुमार, इंद्राणी कुजूर और सुदाम साहू शामिल हैं. एलएडीसीएस चीफ नसीम अंसारी सोमवार और गुरुवार को लोहरदगा और पेशरार थाना, डिप्टी चीफ नारायण साहू सोमवार और गुरुवार को अहतू व एससी/ एसटी थाना, डिप्टी चीफ उमेश कुमार सोमवार और बुधवार को कुड़ू और बगडू थाना, सहायक सुदामा साहू सोमवार और गुरुवार को महिला और जोबांग थाना, सहायक इंद्राणी कुजूर सोमवार और गुरुवार को भंडरा और किस्को थाना, सहायक भूपेंद्र कुमार बुधवार और शुक्रवार को सेन्हा और कैरो थाना का दौरा करेंगे. इन लोगों का कार्य गरीब और वंचित लोगों को गिरफ्तारी पूर्व विधिक सहायता प्रदान करना है. नालसा की पहल पर गिरफ्तारी से पहले कानूनी सहायता की शुरूआत की गयी है. गिरफ्तारी से पूर्व की स्थितियों में कानूनी सहायता की भूमिका न केवल संदिग्धों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद करती है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी सहायक होती है. उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाये गये व्यक्ति अक्सर असुरक्षित और भयभीत महसूस करते हैं. कानूनी सहायता के तहत वकील की उपस्थिति से व्यक्ति कम भयभीत महसूस करता है. वहीं, अधिवक्ता थाने में आरोपी को उसके संवैधानिक अधिकारों के बारे में सलाह दे सकते हैं. यदि कोई गिरफ्तारी अपरिहार्य हो तो वे आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और जमानत पाने में भी मदद कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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By SHAILESH AMBASHTHA

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