जश्न ए दस्तारबंदी में इंसानियत और अमन का संदेश

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जश्न ए दस्तारबंदी में इंसानियत और अमन का संदेश

जश्न ए दस्तार हुफ्फाज व कारी का आयोजन बड़े ही धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ उर्स मैदान में सम्पन्न हुआ

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हजरत मौलाना मसरूर रज़ा यूसुफ़ी ने कहा नबी-ए-पाक की सीरत ही दुनिया के लिए रहमत फोटो कार्यक्रम में शामिल मौलाना लोहरदगाः. जेरे निगरानी अंजुमन इस्लामिया द्वारा संचालित मदरसा हजरत बाबा दुखन शाह (र.अ.) में सैय्यदुल अंबिया कॉन्फ़्रेंस सह जश्न ए दस्तार हुफ्फाज व कारी का आयोजन बड़े ही धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ उर्स मैदान में सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम की सरपरस्ती हाफिज व कारी शफिकुर्रहमान रिज़वी ने की. अध्यक्षता मौलाना कारी शमीम रिज़वी साहब ने की. जबकि संचालन मौलाना हलचल शिवानी ने किया. इस जलसा में 10 नये हुफ्फाज और तीन कारी की पगड़ीपोशी की गयी .कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हज़रत सैयद शाह डॉक्टर मसरूर रज़ा साहब ने शिरकत की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम अमन, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम देता है. नबी-ए-पाक की सीरत को अपनाकर ही समाज में शांति, सद्भाव और एकता कायम की जा सकती है. कॉन्फ़्रेंस में जिले भर से बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम, धर्मगुरु और आमजन शामिल हुए. मौलाना सुलतान शम्सी, मौलाना ग़ुलाम रज़ा के अलावा अरमय शरीफ गुमला के पीरे तरिकत सैयद समदानी, सैयद नूर जिल्लानी भी शामिल रहे. कई विद्वानों ने अपने विचार रखे और नबी-ए-पाक की शिक्षाओं पर अमल करने की अपील की. कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन, सलामती और भाईचारे की दुआएं की गयी.

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Vikash Nath

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