गेहूं के बेहतर उत्पादन के लिए खरपतवार को हटायें

गेहूं की फसल शुरुआती दौर में है. इस समय गेहूं की फसल लगाने और उसकी देखभाल का सही समय है.
जयनगर. गेहूं की फसल शुरुआती दौर में है. इस समय गेहूं की फसल लगाने और उसकी देखभाल का सही समय है, ताकि बगैर नुकसान के अच्छी पैदावार हो सके. गेहूं की फसल के संबंध में जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के एग्रो फॉरेस्ट्री ऑफिसर रूपेश रंजन ने बताया कि गेहूं की फसल अभी शुरुआती दौर में है. गेहूं के पौधे अभी काफी छोटे-छोटे हैं. इसी समय फसल की उचित देखभाल जरूरी है. इस समय फसल में खरपतवार पनपने लगते हैं. कीट पतंग का प्रकोप बढ़ जाता है. कई बार पौधे मुरझाकर कर सूख जाते हैं. परेशानी सिंचाई और पोषण की कमी के कारण होता है. इससे बचाव के लिए खरपतवार नियंत्रण जरूरी है. उन्होंने बताया की फसल की उपज बढ़ाने के लिए पोषण प्रबंधन जरूरी है. इसके लिए मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उर्वरक का छिड़काव जरूरी है. ऐसी स्थिति में 110 किलो यूरिया, 55 किलो डीएपी, और 20 किलो पोटाश का छिड़काव प्रति हेक्टेयर की दर से करें. यदि गेहूं की फसल में समय पर सिंचाई नहीं की जाये, तो फसल का विकास अवरुद्ध हो जाता है. इसके लिए कम से कम छह व सिंचाई की आवश्यकता है. किसानों को पहली सिंचाई फसल अवधि के 20 से 22 दिन बाद, दूसरी सिंचाई 40-45 दिन बाद, तीसरी सिंचाई 60-65 दिन बाद, चौथी सिंचाई 80-85 दिन बाद, पांचवीं सिंचाई 90-105 दिन बाद तथा छठी सिंचाई 105-110 दिन बाद करें. श्री कुमार ने बताया कि कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड एक लीटर दवा का 300 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिये. वहीं दीमक के प्रकोप से बचने के लिए क्लोरो पाचरीफांस का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिये.
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