बराकर से डोमचांच के लिए जलापूर्ति योजना शुरू करने का विरोध

बराकर नदी किनारे बसे सुगाशाख गांव में प्रशासन की टीम देख लोग नाराज
बराकर नदी किनारे बसे सुगाशाख गांव में प्रशासन की टीम देख लोग नाराज जयनगर. प्रखंड के करियावां पंचायत अंतर्गत बराकर नदी के किनारे बसे सुगाशाख गांव में प्रशासन का काफिला देख लोगों की परेशानी बढ़ गयी. आनन-फानन में सभी ग्रामीण एकजुट हुए. उल्लेखनीय है कि सुगाशाख बराकर नदी से डोमचांच के लिए जलापूर्ति योजना शुरू करने को लेकर यहां इंटकवेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं. यूको कंपनी द्वारा बुधवार को जेसीबी ट्रैक्टर व अस्थायी रूम बनाने के लिए बांस-बल्ली लाया गया. साथ में प्रशिक्षु डीएसपी दिवाकर कुमार, डीएसपी रतिभान सिंह, जयनगर सीओ सारांश जैन, डोमचांच सीओ रवींद्र पांडेय, डीएसओ प्रदीप कुमार, थाना प्रभारी उमानाथ सिंह, एसआई समशुद्दीन खान भारी पुलिस बल के साथ निर्धारित कार्य स्थल पर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने जमकर इनका विरोध किया. प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि हम जान देंगे, लेकिन जल नहीं देंगे. ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस बल के दबाव में जलापूर्ति योजना का कार्य शुरू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कभी सफल नहीं होने देंगे. इस दौरान ग्रामीणों ने केटीपीएस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीवीसी ने 10 किलोमीटर के दायरे में पानी, बिजली मुफ्त देने का वायदा किया था, लेकिन आज तक वादा पूरा नहीं हो सका. इस पर डीएसओ श्री कुमार ने कहा कि ग्रामीणों का विरोध सामने आया है और प्रशासन की ओर से उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, मगर तनावपूर्ण है. क्या कहते हैं ग्रामीण इस मामले का विरोध कर रहे सुगाशाख, विहारो व धोबिया पहरी के ग्रामीणों ने कहा कि यहां से पानी डोमचांच ले जाया गया, तो गांव की स्थिति और भी बदतर हो जायेगी. इस क्षेत्र के अधिकतर लोग किसान हैं और पूरी तरह से खेती पर निर्भर है. पानी की गंभीर किल्लत के कारण सामाजिक अथवा पारिवारिक आयोजन के लिए उन्हें बाहर से पानी मंगाना पड़ता है. ऐसे में यहां इंटकवेल का निर्माण होने से पानी के लिए हाहाकार हो जायेगा. ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी कीमत पर यहां इंटकवेल बनने नहीं देंगे. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के सर्वे के दौरान न तो ग्राम सभा का आयोजन किया गया और न ही ग्रामीणों को सूचना दी गयी. पुलिस का भय दिखाकर काम निकालने का प्रयास किया गया, तो आंदोलन तेज होगा.
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