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कोडरमा में अब दही चूड़ा की सियासत हुई कम

झारखंड के कोडरमा विधानसभा क्षेत्र में मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा तिलकुट कार्यक्रम लंबे समय से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच रहा है.

दही-चूड़ा कार्यक्रम और कोडरमा की राजनीति विधानसभा चुनाव से पहले तक कई नेता करते थे आयोजन लगातार दो वर्षों से दही चूड़ा कार्यक्रम को लेकर टसल नहीं ————— प्रतिनिधि, कोडरमा झारखंड के कोडरमा विधानसभा क्षेत्र में मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा तिलकुट कार्यक्रम लंबे समय से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच रहा है. यह आयोजन केवल सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि नेताओं के लिए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और अपनी ताक़त दिखाने का अवसर भी रहा है. एक समय था जब 14 और 15 जनवरी को कई नेताओं के आवास पर एक साथ कार्यक्रम होते थे और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा किसी चुनावी रैली जैसा दृश्य प्रस्तुत करता था. परंपरा की शुरुआत और विस्तार इस परंपरा की शुरुआत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी के चाराडीह स्थित आवास से हुई थी. बाद में विधायक डॉ. नीरा यादव ने भी इसे अपनाया. दिलचस्प बात यह रही कि जब अन्नपूर्णा देवी राजद में थीं और विधानसभा चुनाव में डॉ. नीरा यादव से हार गईं, तब भी दोनों ने यह आयोजन जारी रखा. इसके बाद पूर्व जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता और राजद नेता सुभाष प्रसाद यादव ने भी अपने-अपने आवास पर कार्यक्रम शुरू किया. इस तरह एक समय में चार-चार नेताओं के यहां दही-चूड़ा कार्यक्रम होता था और शक्ति प्रदर्शन की होड़ साफ दिखती थी. बदलती तस्वीर पिछले दो वर्षों से इस परंपरा में बदलाव देखा जा रहा है. 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद विधायक डॉ. नीरा यादव ने कार्यक्रम आयोजित नहीं किया. वहीं शालिनी गुप्ता ने भी पारिवारिक कारणों से आयोजन से दूरी बना ली. लगातार दूसरे वर्ष इन दोनों नेत्रियों के कार्यक्रम न होने से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का रंग फीका पड़ गया है. सोशल मीडिया पर लोग इस बदलाव पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कुछ इसे राजनीति की ठंडी पड़ती परंपरा मानते हैं तो कुछ इसे नेताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव के रूप में देखते हैं. बरकट्ठा की स्थिति जहां कोडरमा में शक्ति प्रदर्शन का दौर थम गया है, वहीं पड़ोसी बरकट्ठा विधानसभा में अब भी वही पुरानी तस्वीर दिखती है. वर्तमान विधायक अमित कुमार यादव और पूर्व विधायक जानकी प्रसाद यादव दोनों ने इस बार भी दही-चूड़ा कार्यक्रम आयोजित किया. इससे स्पष्ट है कि बरकट्ठा में यह परंपरा अब भी राजनीतिक महत्व रखती है. 2026 के आयोजन इस वर्ष भी कोडरमा में बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं दिखी. हालांकि कुछ नेताओं ने आयोजन किया है. – अन्नपूर्णा देवी: 15 जनवरी को सुबह 11 बजे चाराडीह स्थित आवास पर कार्यकर्ता मिलन समारोह रखा गया है. इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे. – सुभाष प्रसाद यादव: विशुनपुर रोड, तिलैया स्थित आवास पर सुबह 11 बजे दही-चूड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया है. – स्थानीय स्तर पर: डोमचांच प्रमुख सत्यनारायण यादव और समाजसेवी शिवनाथ यादव ने भी कार्यक्रम रखा है. सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व दही-चूड़ा कार्यक्रम का सांस्कृतिक महत्व झारखंड और बिहार दोनों में गहरा है. मकर संक्रांति पर दही, चूड़ा और तिलकुट का सेवन शुभ माना जाता है. लेकिन कोडरमा में यह परंपरा राजनीति से जुड़कर शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बन गयी थी. नेताओं के लिए यह अवसर होता था कि वे कार्यकर्ताओं को जोड़ें, अपनी लोकप्रियता दिखाएँ और आगामी चुनावों के लिए माहौल तैयार करें.

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