कोडरमा में आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों का धरना, न्यूनतम मानदेय और छह माह के बकाया भुगतान की मांग

कोडरमा में प्रदर्शन करते श्रम अधीक्षक कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते आउट सोर्सिंग के कर्मचारी. फोटो: प्रभात खबर
कोडरमा में स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर धरना दिया. उन्होंने न्यूनतम मानदेय लागू करने, छह महीने के बकाया भुगतान और ईपीएफ अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है. कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है.
कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट
Koderma News: झारखंड स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ (सीटू) की जिला कमिटी, कोडरमा के बैनर तले शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर श्रम अधीक्षक कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय लागू करने, पिछले छह माह से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने तथा ईपीएफ (EPF) और अन्य वित्तीय मामलों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई. धरना के दौरान बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा और कहा कि लंबे समय से मांगें उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
मानदेय में भारी अंतर का लगाया आरोप
धरना को संबोधित करते हुए संघ के प्रतिनिधियों ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रत्येक कर्मचारी के लिए लगभग 26 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन कर्मचारियों के हाथ में केवल 12,000 से 12,600 रुपये तक का ही मानदेय पहुंचता है. संघ का कहना है कि भुगतान की राशि और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक मानदेय के बीच बड़ा अंतर है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि शेष राशि कहां जा रही है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
छह माह से नहीं मिला मानदेय
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि पिछले छह माह से उन्हें नियमित मानदेय नहीं मिला है. इसके कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कई कर्मचारियों को परिवार का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं होना उनके साथ अन्याय है. उन्होंने प्रशासन से लंबित मानदेय का जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की.
ईपीएफ अनियमितताओं की जांच की मांग
धरना के दौरान कर्मचारियों ने ईपीएफ से जुड़े मामलों में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया. उनका कहना है कि कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ईपीएफ की राशि का सही तरीके से जमा होना आवश्यक है, लेकिन इस संबंध में कई शिकायतें सामने आ रही हैं. संघ ने मांग की कि ईपीएफ और अन्य वित्तीय मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए. यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.
न्यूनतम मानदेय लागू करने की मांग
आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार से मांग की कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. उनका कहना है कि मौजूदा मानदेय महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन की लागत के अनुरूप नहीं है. कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण सेवाओं में लगातार योगदान दे रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. ऐसे में सरकार को उनके हितों की रक्षा के लिए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए.
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज
धरना के दौरान झारखंड स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ (सीटू) के नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. संघ का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से धैर्य के साथ समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा के कारण अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे.
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा. उनकी प्रमुख मांगें कई हैं.
- सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय तत्काल लागू किया जाए.
- पिछले छह माह से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए.
- ईपीएफ एवं अन्य वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए.
संघ ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा. वहीं कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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