डीएस के निजी अस्पताल में बिगड़ी मरीज की हालत

Updated at : 22 May 2019 12:40 AM (IST)
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डीएस के निजी अस्पताल में बिगड़ी मरीज की हालत

परिजनों ने सुधा क्लिनिक के संचालक पर लगाया लापरवाही का आरोप विरोध बढ़ता देख डाॅक्टर ने खुद की खर्च पर रांची में इलाज कराने की बात कही झुमरीतिलैया : जिले में आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के एक बच्चे की मौत के बाद जहां निजी अस्पतालों, जांच घर व अल्ट्रासाउंड पर शिकंजा कसा जा रहा है, […]

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परिजनों ने सुधा क्लिनिक के संचालक पर लगाया लापरवाही का आरोप

विरोध बढ़ता देख डाॅक्टर ने खुद की खर्च पर रांची में इलाज कराने की बात कही
झुमरीतिलैया : जिले में आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के एक बच्चे की मौत के बाद जहां निजी अस्पतालों, जांच घर व अल्ट्रासाउंड पर शिकंजा कसा जा रहा है, वहीं मंगलवार को एक मामला ऐसा आया, जिससे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. निजी क्लिनिकों पर नियमों का पालन नहीं करने के मामले में कार्रवाई को लेकर गठित जांच टीम में शामिल रहने वाले सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ आर कुमार के निजी अस्पताल में एक मरीज की हालत बिगड़ी, तो परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगा दिया.
विरोध बढ़ता देख डाॅक्टर बचाव मुद्रा में आ गये और रांची में मरीज के इलाज की व्यवस्था करने की बात कह कर परिजनों को शांत कराया. जानकारी के अनुसार विशुनपुर रोड स्थित सुधा क्लिनिक में खरकोटा गांव के अशोक यादव (पिता- बाबूलाल यादव) गॉल ब्लॉडर के ऑपरेशन के लिए दो दिन पूर्व भर्ती हुए थे. रविवार की रात उनका ऑपरेशन हुआ, परंतु खून का रिसाव बंद नहीं हुआ.
परिजनों के दबाव के बाद मंगलवार को उन्हें रांची भेजा गया, वह भी क्लिनिक के संचालक के खर्चे पर. अशोक यादव के पिता बाबूलाल यादव ने बताया कि चिकित्सक के बताये अनुसार सभी जांच उन्होंने करवाये थे. दो दिन पूर्व उनके पुत्र का ऑपरेशन भी हुआ. ऑपरेशन के एक दिन बाद उन्होंने देखा तो खून का रिसाव हो रहा था. चिकित्सक द्वारा दूसरे दिन मुझे बिना बताये दोबारा ऑपरेशन किया गया, परंतु फिर भी खून का रिसाव बंद नहीं हुआ. मुझे बिना बताये मेरे पुत्र को खून चढ़ाया गया.
मंगलवार को चिकित्सक द्वारा बताया गया कि हमलोगों द्वारा चार बोतल खून की व्यवस्था की गयी है, आप लोग अपने स्तर से दो बोतल खून की व्यवस्था कर लें. जब उन्होंने चिकित्सक से पूछा कि ऑपरेशन के बाद भी खून का रिसाव क्यों नहीं रुक रहा है, तो चिकित्सक ने मरीज को दूसरे जगह ले जाने की बात कही. बाद में ग्रामीणों व नेताओं के दबाव देने पर अपने खर्च पर रांची में उपचार कराने की बात चिकित्सक ने कही.
ऑपरेशन के बाद कभी-कभी होती है ब्लीडिंग: डाॅ आर कुमार
इस संबंध में पूछे जाने पर क्लिनिक के संचालक डॉ आर कुमार ने कहा कि कभी-कभी ऑपरेशन के बाद ब्लीडिंग होती है. मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा था, उसे खून भी चढ़ाया गया था, परंतु जब मरीज के परिजनों को मुझ पर विश्वास नहीं रहा, तो उसे रांची रेफर कर दिया. वहां के उपचार का खर्च वे स्वयं वहन करेंगे.
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