खूंटी : सरकारी इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने संभाली कमान, श्रमदान कर 820 फीट नहर को किया दुरुस्त
श्रमदान करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
खूंटी जिले के चिरूडीह गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान कर टूटी हुई नहर की मरम्मत का बीड़ा उठाया. 1965 से जीर्णोद्धार के अभाव में यह नहर खराब हो गई थी, जिससे 300 एकड़ भूमि की सिंचाई प्रभावित हो रही थी. अब ग्रामीणों के प्रयास से स्थिति सुधरी है.
खूंटी. अड़की प्रखंड के चिरूडीह गांव में ग्रामीणों ने श्रमदान कर टूटे हुए नहर की मरम्मत की. ग्राम प्रधान सागर सिंह मुंडा की अगुवाई में ग्रामीणों ने नहर में जमा गाद और मिट्टी को हटाया. इसके अलावा जगह-जगह टूटे नहर के हिस्सों की भी मरम्मत की गई.
नहर से करीब 300 एकड़ भूमि की सिंचाई
ग्राम प्रधान सागर सिंह मुंडा ने बताया कि इस नहर से करीब 300 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है. नहर की मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने झारखंड सरकार और उपायुक्त खूंटी को कई बार आवेदन दिया, लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. इसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही नहर की मरम्मत करने का निर्णय लिया.
डैम और नहर का निर्माण वर्ष 1965 में
ग्रामीणों ने करीब 820 फीट नहर की मरम्मत की है. ग्राम प्रधान के अनुसार, इस नहर से चिरूडीह, पांडुडीह और तेलगडीह गांव की जमीन की सिंचाई होती है. नहर की कुल लंबाई करीब दो किलोमीटर है. बताया गया कि डैम और नहर का निर्माण वर्ष 1965 में किया गया था. इसके बाद से अब तक डैम और नहर का जीर्णोद्धार नहीं हुआ. देखरेख के अभाव में नहर धीरे-धीरे कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गई. वहीं, नहर में मिट्टी और गाद भर जाने के कारण पानी का प्रवाह भी प्रभावित हो रहा था.
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नहर की स्थिति खराब होने से खेती प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि नहर की स्थिति खराब होने से खेती प्रभावित हो रही थी. लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण ग्रामीण परेशान और आक्रोशित थे. इसके बाद ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय आपसी सहयोग और श्रमदान से नहर की मरम्मत का काम शुरू किया.
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