सफलता की कहानी, जामताड़ा की "स्ट्रॉबेरी दीदी " मुसर्रत खातून

Published by : UMESH KUMAR Updated At : 09 Apr 2026 7:29 PM

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जामताड़ा. परिवर्तन के लिए केवल एक मजबूत इच्छाशक्ति और सही दिशा की जरूरत होती है. इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव की मुसर्रत खातून ने.

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– पारंपरिक खेती छोड़ स्ट्रॉबेरी से लिखी जा रही सफलता की नयी इबारत संवाददाता, जामताड़ा. परिवर्तन के लिए केवल एक मजबूत इच्छाशक्ति और सही दिशा की जरूरत होती है. इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव की मुसर्रत खातून ने. जेएसएलपीएस से जुड़कर और ””गुलाब आजीविका सखी मंडल”” की सदस्य बनकर मुसर्रत खातून ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली है, बल्कि जिले के किसानों के लिए स्ट्रॉबेरी की खेती के रूप में एक नया रास्ता भी खोल दिया है. एक साधारण गृहणी और पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली मुसर्रत खातून की जिंदगी में बदलाव तब आया, जब वह सखी मंडल से जुड़ीं. जेएसएलपीएस के माध्यम से मिली ट्रेनिंग और प्रोत्साहन ने उन्हें कुछ नया करने का साहस दिया, जहां जामताड़ा में धान और मकई की खेती ही मुख्य आधार रही है, वहां उन्होंने स्ट्रॉबेरी जैसे “हाई-वैल्यू ” फल की खेती करने का साहसिक निर्णय लिया. आज मुसर्रत खातून की मेहनत से उनकी खेत में स्ट्रॉबेरी लहलहा रहे हैं. उनकी इस पहल से न केवल उनकी आमदनी में कई गुना इजाफा हुआ है, बल्कि स्थानीय बाजार में भी इसकी भारी मांग है. उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर तकनीकी सहयोग और मेहनत का मेल हो, तो झारखंड की मिट्टी में भी विदेशी फलों की पैदावार की जा सकती है. जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती की नींव उनके द्वारा रखी गयी है, जो आने वाले समय में जिले के लिए एक नयी पहचान बनेगी. उनकी देखा-देखी अब अन्य महिलाएं और किसान भी इस कैश क्रॉप (नकदी फसल) की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

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