सरकारी विद्यालयों में गैस से बनेगा मध्याह्न भोजन

Updated at : 29 May 2017 3:52 AM (IST)
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सरकारी विद्यालयों में गैस से बनेगा मध्याह्न भोजन

गुड न्यूज . धुआं रहित होगा स्कूलों का रसोई घर जामताड़ा : सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों व रसोइया एवं पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन गंभीर है. अब सभी सरकारी विद्यालयों में मध्यान भोजन एलपीजी रसोइगैस से बनेगा. इसके लिए राज्य सरकार से जिलास्तर के पदाधिकारी को एलपीजी का कनेक्शन […]

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गुड न्यूज . धुआं रहित होगा स्कूलों का रसोई घर

जामताड़ा : सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों व रसोइया एवं पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन गंभीर है. अब सभी सरकारी विद्यालयों में मध्यान भोजन एलपीजी रसोइगैस से बनेगा. इसके लिए राज्य सरकार से जिलास्तर के पदाधिकारी को एलपीजी का कनेक्शन लेने का निर्देश मिला है. गैस से मध्याह्न भोजन बनाने में एक ओर जहां रसोइया को काफी आसानी होगी, तो दूसरी ओर एलपीजी से मध्याह्नन भोजन बनाने में हर मौसम के लिए अनुकूल होगा.
पर्यावरण पर भी असर नहीं पड़ेगा. रसोइगैस का कनेक्शन सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के नाम से लिया जायेगा. आम घरों की तरह गैस कनेक्शन घेरलू कनेक्शन होगा, जिसमें गैस की खरीदारी के बाद सब्सिडी भी मिलेगी. सब्सिडी के लिए विद्यालय का यूडायस कोड एवं सरस्वती वाहिनी संचालन समिति का बैंक खाता डीलर को देना पड़ेगा.
गैस कनेक्शन लेने के लिये इन बातों पर ध्यान देना अनिवार्य
एलपीजी रसोइगैस कनेक्शन लेने के पूर्व विद्यालय प्रबंधन को सर्वप्रथम किचेन शेड बनाना अनिवार्य है. साथ ही किचेन शेड साफ सुथरा भी रहनी चाहिए. किचेन शेड नहीं रहने पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी. एलपीजी आधारित रसोइ वाले कमरे में अन्य ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखना होगा. ताकि किसी प्रकार को अप्रिय घटना न घटे. सरस्वती वाहिनी को अपने निकटतम गैस एजेंसी के पास ही कनेक्शन लेना होगा.
सिलिंडर एवं चूल्हा की गणना
जिस विद्यालय में एक से 50 बच्चों का मध्याह्न भोजन बनता है तो वैसे विद्यालय में दो सिलिंडर की खरीदारी करना होगा. जबकि दो चूल्हा भी साथ में रहेगा. वहीं 51 बच्चों से दो सौ बच्चों तक का मध्याह्नन भोजन बनने वाले विद्यालय में तीन सिलिंडर एवं दो चूल्हा की खरीदारी करना पड़ेगा. 201 बच्चों से पांच सौ बच्चों तक का मध्याह्नन भोजन बनने वाले विद्यालयों में चार सिलिंडर व तीन चूल्हा की खरीदारी करना पड़ेगा. पांच सौ से ज्यादा बच्चों का मध्याह्नन भोजन बनने वाले विद्यालय में पांच सिलिंडर व चार चूल्हा की खरीदारी करना पड़ेगा.
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