दो चापानल से बुझ रही दो हजार लोगों की प्यास

ठाकुरगंगटी : प्रखंड के अल्पसंख्यक गांव कुरमा में लोगों को समुचित पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है. यह माल मंडरो पंचायत के अंतर्गत आता है. पेयजल के लिए ग्रामीण हलकान हैं. यह हाल कोई एक दिन का नहीं है. गांव में घनी आबादी है. तीन हजार की आबादी सिर्फ कुरमा गांव में निवास करती है. […]
ठाकुरगंगटी : प्रखंड के अल्पसंख्यक गांव कुरमा में लोगों को समुचित पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है. यह माल मंडरो पंचायत के अंतर्गत आता है. पेयजल के लिए ग्रामीण हलकान हैं. यह हाल कोई एक दिन का नहीं है. गांव में घनी आबादी है. तीन हजार की आबादी सिर्फ कुरमा गांव में निवास करती है. गांव में सही ढंग से पीने के लिए मात्र दो चापानल है. जैसे-तैसे लोगों की प्यास बुझ रही है.
जिसमें दो चापानल का पानी ही पीने योग्य है. चार चापानल पहले ही सूख चुके हैं. यहां के ग्रामीणों को पानी की व्यवस्था करने में काफी परेशानी हो रही है. दो चापानलों पर ही तीन हजार की आबादी आश्रित है. ग्रामीणों को गांव से बाहर स्थित सिंचाई कूप से पानी ढोकर गांव लाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में तकरीबन 300 छोटे बड़ेे घर हैं.
गरमी में पेयजल की समस्या और भी विकराल हो गयी है. कागजों पर दौड़ती है अल्पसंख्यक गांवों के विकास का दावा : ग्रामीण महफिल अंसारी, रसुद्दीन अंसारी, मो सलाम अंसारी, वशीर अंसारी, मनीर अंसारी ने बताया कि अल्पसंख्यक गांवों के विकास का दावा चाहे राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन चाहे जितना कर ले, लेकिन धरातल पर इसकी सच्चाई एकदम विपरीत है. कागजों पर ही विकास की योजनाएं दौड़ती है. प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस क्षेत्र के प्रति गंभीर होने की मांग की है.
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