डिजिटल क्रांति की ओर आदिवासी संताल समाज, एक क्लिक में उपलब्ध होगा गांवों का संपूर्ण डिजिटल डाटा

Updated:
विज्ञापन

डिजिटल प्लेटफॉर्म.

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

सैकड़ों साल पुरानी माझी परगना व्यवस्था अब डिजिटल हो रही है. आदिवासी समाज अपने गांवों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से दर्ज कर रहा है. यह पहल समाज को आधुनिकता से जोड़ते हुए उसकी जड़ों को मजबूत करेगी.

विज्ञापन

जमशेदपुर : सैकड़ों सालों से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था-माझी परगना महाल सिस्टम के सहारे आगे बढ़ रहा आदिवासी समाज अब एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन रहा है. अब तक जो सामाजिक व्यवस्था केवल मौखिक परंपराओं, माझी बाबा और परगना बाबा के निर्देशों से संचालित होती थी, वह अब लिखित दस्तावेजों और आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का रूप ले रही है. कंप्यूटर और इंटरनेट के इस दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता को अपनाना आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास और प्रगति की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है. इस पहल के तहत माझी परगना महाल ने अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म (www.mpmorg.in) तैयार किया है.

विज्ञापन

शैक्षणिक व आर्थिक गतिविधि को डिजिटाइज किया जा रहा है

इसके माध्यम से गांवों की हर सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधि को डिजिटाइज किया जा रहा है. अब माझी परगना व्यवस्था के प्रमुखों के पास अपने कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों का विस्तृत डाटा कंप्यूटर पर एक क्लिक में उपलब्ध है. गांव में कुल घरों की संख्या, कुल आबादी, शिक्षित युवाओं का आंकड़ा, रोजगार की स्थिति और वंशावली जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है. गांव के माझी बाबा को विशिष्ट लॉगिन आईडी प्रदान की गई है, जिससे वे विशेषज्ञों की मदद से अपने गांव से जुड़े आंकड़े अपडेट करते हैं.

ग्राउंड से टॉप लेवल तक मजबूत नेतृत्व का प्रशिक्षण

डिजिटल व्यवस्था को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करने के लिए माझी बाबा, पारानिक बाबा और समाज के अन्य अगुओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण के माध्यम से समाज की मॉनिटरिंग को गांव यानी ग्राउंड लेवल से लेकर परगना महाल (टॉप लेवल) तक पारदर्शी और आसान बनाया जा रहा है. वर्तमान में माझी परगना महाल धाड़ दिशोम द्वारा लगभग 1,400 राजस्व गांवों को इस लिखित और डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाना है. फिलहाल आधे से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है. आने वाले समय में इसका विस्तार पूरे झारखंड राज्य में करने की योजना है, जिससे पूरे समाज में एक पारदर्शी और सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचा खड़ा होगा.

संविधान व स्वशासन व्यवस्था के तालमेल से करेंगे सर्वांगीण विकास

डिजिटलाइजेशन की इस प्रक्रिया से समाज की सांस्कृतिक स्वायत्तता और आधुनिक लोकतांत्रिक प्रणाली के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है. पारंपरिक स्वशासन और देश के संवैधानिक प्रावधानों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर गांवों के विकास को नई रफ्तार दी जा रही है. आंकड़ों के डिजिटाइज होने से युवाओं के नियोजन, रोजगार, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी मदद मिल रही है. यह पहल न केवल आदिवासी समाज को दौर के साथ कदमताल करने के काबिल बना रही है, बल्कि उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और अस्तित्व को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने का एक सशक्त माध्यम भी बन रही है.

जमाने के साथ कदमताल करने के लिए यह कदम जरूरी : बैजू

धाड़ दिशोम देश परगना बैजू मुर्मू ने बताया कि अब आदिवासी समाज केवल मौखिक परंपरा तक सीमित न रहकर लिखित दस्तावेज और डिजिटलाइजेशन की ओर तेजी से बढ़ रहा है. समाज की हर गतिविधि, विकास कार्य, गांव का लेखा-जोखा, शैक्षणिक स्थिति और रोजगार के आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. कंप्यूटर युग में समाज को पीछे न छूटने देने और जमाने के साथ कदमताल कराने के लिए यह प्रयास बहुत जरूरी है. इससे माझी परगना व्यवस्था के प्रमुखों को एक क्लिक पर पूरी जानकारी मिल रही है. माझी बाबा और पारानिक बाबा को प्रशिक्षित कर मॉनिटरिंग को पारदर्शी बनाया जा रहा है. आदिवासी समाज के अस्तित्व और पहचान को बचाए रखने के लिए यह तकनीक एक बेहद सशक्त और आधुनिक माध्यम साबित होगी.

फिलहाल 1400 आदिवासी गांवों में लागू है सिस्टम : दुर्गाचरण

धाड़ दिशोम देश पारानिक दुर्गाचरण मुर्मू ने बताया कि यह पूरी पहल हमारी पारंपरिक सांस्कृतिक व्यवस्था को बिना कोई नुकसान पहुंचाए आधुनिक तकनीक के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाने का एक अनूठा प्रयास है. आंकड़ों के डिजिटाइज होने से समाज के सर्वांगीण विकास, युवाओं के रोजगार नियोजन और सामाजिक निर्णय लेने में काफी सहूलियत हो रही है. देश संविधान और प्रजातांत्रिक व्यवस्था से चलता है, इसलिए हम स्वशासन प्रणाली और संवैधानिक प्रावधानों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाकर काम कर रहे हैं. फिलहाल धाड़ दिशोम के 1400 राजस्व गांवों में यह डिजिटल और लिखित सिस्टम सफलता से लागू हो चुका है. जल्द ही इसका विस्तार पूरे झारखंड में किया जाएगा, ताकि हर गांव की उन्नति और प्रगति को सुनिश्चित किया जा सके.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola