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आत्मनिर्भर भारत अभियान : आदित्यपुर में बनेंगे बुलेट प्रूफ जैकेट और अन्य रक्षा उत्पाद

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date

जमशेदपुर : केंद्र सरकार के नये निर्णय ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र सहित राज्य के उद्योगों के लिए रक्षा क्षेत्र में बड़ा अवसर प्रदान किया है. यहां के उद्यमी व राज्य सरकार यदि इस मौके का लाभ लेने के लिए सक्रिय नहीं हुए, तो इस मामले में अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड पिछड़ जायेगा. वैसे यहां रक्षा व रेलवे में आपूर्ति के लिए पिछले कुछ वर्षों से प्रयास जारी हैं, लेकिन अब ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में प्रयुक्त 101 उत्पादों के आयात पर जो रोक लगायी है, उससे यहां के उद्योगों के लिए अच्छे अवसर मिलनेवाले हैं. सूत्र बताते हैं कि उद्यमी यदि इसके लिए विभाग के पास अपने प्रयास से स्वयं को प्रस्तुत कर रहे हैं.

इएमसी के उद्यमी होंगे लाभान्वित : केंद्र व राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग से आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर (इएमसी) का निर्माण हो रहा है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक आइटम के उत्पादन के लिए हर सुविधा मिलेगी.

उद्यमियों के लिए यहां प्लॉट के साथ फ्लैटेड फैक्टरी का भी आवंटन होगा. इन उद्यमियों को भी सरकार के निर्णय का लाभ मिल सकता है. लेकिन अब देखना है कि डिफेंस में कितने आइटम की जरूरत पड़ती है. फ्लैटेड फैक्टरी रेंट पर भी दी जायेगी. यहां अब तक कई प्लॉट का आवंटन भी हो चुका है, लेकिन लॉकडाउन के कारण इएमसी की प्रक्रिया थोड़ी सुस्त पड़ी हुई है.

टाटा मोटर्स भी रक्षा क्षेत्र के वाहनों की आपूर्ति में लगा रहा जोर : टाटा मोटर्स ने भी रक्षा क्षेत्र के वाहनों की आपूर्ति में जोर लगा दिया है. टाटा एडवांस सिस्टम इसके लिए पहले से काम कर रहा है. कंपनी अपने वेंडरों को डिफेंस कंसोलिडेट कर रही हैं.

ऐसा नहीं है कि इस समय रक्षा क्षेत्र के उत्पादों का निर्माण यहां नहीं हो रहा है. टीजीएस, आरकेएफएल और नलिन रबर प्राइवेट लिमिटेड ऐसी कंपनियां हैं, जो रक्षा क्षेत्र में अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही हैं. दो दर्जन से अधिक ऐसी कंपनियां हैं, जो टाटा मोटर्स के माध्यम से अप्रत्यक्ष तौर पर रक्षा क्षेत्र के उत्पाद बना रही हैं.

डिफेंस में काम करने मौका मिलने से बढ़ेगा उद्यमियों का रुतबा : उद्यमियों का कहना है कि यहां के उद्यमी डिफेंस की ओर से अग्रसर होने के लिए पिछले दो वर्षों से प्रयासरत हैं. साथ ही यदि उन्हें डिफेंस में काम करने का मौका मिला, देश सेवा के साथ-साथ उनका मान-सम्मान भी बढ़ जायेगा.

इसी के तहत पिछले वर्ष उद्यमियों के सहयोग से ही वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया था. इसमें काफी संख्या में उद्यमियों ने डिफेंस में जाने की रुचि दिखायी थी. इसके लिए तत्कालीन उद्योग सचिव ने भी उद्यमियों का हौसला बढ़ाया था. उद्यमियों ने रुचि दिखाते हुए लखनऊ, कानपुर, कोलकाता भी जाकर इसकी जानकारी ली थी.

डिफेंस में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की मांग : आयात पर रोक से रक्षा क्षेत्र में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की आपूर्ति की काफी मांग होनेवाली है. आदित्यपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर (इएमसी) की स्थापना हुई है, लेकिन लॉकडाउन के कारण इसकी प्रगति में बाधा आयी है.

जानकार बताते हैं कि भारतीय सेना (जल, थल व वायु सेना) के लिए नाइट विजन गॉगल्स, अर्ली अलार्म सिस्टम आदि ऐसे कई इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम हैं, जिनका उत्पादन आदित्यपुर में भी किया जा सकता है. इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को छोड़ दें, तो हाइ एल्टीच्यूड फूड, हाइ प्रोटीन फूड समेत और भी कई उत्पाद यहां तैयार हो सकते हैं, जिसकी डिफेंस में काफी मांग रहती है.

केंद्र के 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक लगने से राज्य के उद्योगों को मिलेगा अवसर

बनेंगे ये रक्षा उत्पाद

बुलेट रेजिस्टेंस जैकेट

बॉडी आर्मर

प्रोटेक्टिव गार्मेंट्स

बुलेट रेजिस्टेंस हेलमेट

बैलिस्टिक हेलमेट

बैलिस्टिक पैनल

नाइट विजन गॉगल्स

अर्ली अलार्म सिस्टम

हाइ एल्टीच्यूड फूड

हाइ प्रोटीन फूड

नलिन रबर को मिला स्ट्रेटेजिक इंडस्ट्रियल लाइसेंस : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की नलिन रबर प्राइवेट लिमिटेड को डिपार्टमेंट फॉर इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड से स्ट्रेटेजिक इंडस्ट्रियल लाइसेंस प्राप्त हुआ है. कंपनी के निदेशक दिव्यांशु सिन्हा ने बताया कि उनकी कंपनी सेना में प्रयुक्त होनेवाले कई उत्पाद का उत्पादन कर रही है. वैसे कंपनी बुलेटप्रूफ जैकेट, बुलेट रेजिस्टेंस जैकेट, बॉडी आर्मर, प्रोटेक्टिव गार्मेंट्स, बुलेट रेजिस्टेंस हेलमेट, बैलिस्टिक हेलमेट, बैलिस्टिक पैनल आदि कई आइटम बनाने वाली है.

श्री सिन्हा ने बताया कि रक्षा उत्पादों के लिए विभाग ने कई प्रकार के नियमों में सुधार किया है, जिसका लाभ यहां के उद्यमियों को मिलेगा. चीन की सीमा पर सड़क बनवा रहे बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने झारखंड से सबसे अधिक कामगारों को लिया है. उनके लिए झारखंड में प्रशिक्षण केंद्र खुलना चाहिए.

Post by : Pritish Sahay

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