स्कूली बच्चों ने बनायी फिल्म, पाठ्यक्रम में थियेटर व सिनेमा जुड़ेंगे

Published by :SANJAY PRASAD
Published at :06 May 2026 12:55 AM (IST)
विज्ञापन
स्कूली बच्चों ने बनायी फिल्म, पाठ्यक्रम में थियेटर व सिनेमा जुड़ेंगे

स्कूली बच्चों ने बनायी फिल्म, पाठ्यक्रम में थियेटर व सिनेमा जुड़ेंगे

विज्ञापन

jamshedpur.

शिक्षा का मतलब अब सिर्फ भारी-भरकम बस्ता और बंद कमरों में लेक्चर तक सीमित नहीं रहा. शहर के काव्यप्ता ग्लोबल स्कूल ने पढ़ाई में बच्चों को फिल्म निर्माण और थियेटर की दुनिया से जोड़ा है. इस पहल के तहत स्कूली बच्चों ने न केवल अपनी कल्पनाशक्ति का परिचय दिया है, बल्कि एक पूरी फिल्म (महाकाव्य) भी तैयार की है, जो जल्द ही दुनिया के सामने होगी. इस विशेष प्रोजेक्ट के पीछे आरकेजी डॉट एआइ और नैनो स्कूल के संस्थापक राजेश जॉर्ज कुलंगारा की सोच है. उन्होंने बच्चों को प्रोजेक्ट का सह निर्माता बनाकर उनकी रचनात्मकता को एक बड़ा प्लेटफॉर्म दिया है. स्कूल के बच्चों द्वारा तैयार की गयी इस पहली सिनेमैटिक फिल्म का मंगलवार को टाइटल लॉन्च किया गया. इसे लेकर स्कूल परिसर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान बताया गया कि यह दुनिया की पहली ऐसी फिल्म है, जिसे पहली से 12वीं तक के 1000 से अधिक छात्रों ने मिल कर तैयार किया है.

मशीनें बुद्धिमान हुईं, तो इंसानों का क्या होगा :

स्कूल की प्रिंसिपल कविता अग्रवाल ने बताया कि सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फीचर फिल्म में छात्र केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि प्रोडक्शन डिजाइनर, असिस्टेंट डायरेक्टर, वीएफएक्स डिजाइनर और कोरियोग्राफर जैसे तकनीकी पदों पर भी सह-निर्माता का कार्य पूरी तरह से स्कूली छात्रों ने ही किया है. फिल्म एक गंभीर और समसामयिक सवाल उठाती है, जिसमें जब मशीनें (एआइ) बुद्धिमान हो जायेंगी, तो इंसानों को क्या बनना चाहिए. यह फिल्म केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि स्कूल के नये शिक्षा मॉडल का एक अहम हिस्सा है. कविता अग्रवाल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत के पहले पूर्ण के-12 ऑरेंज इकोनॉमी पाठ्यक्रम का हिस्सा लिया. कहा कि हमारा लक्ष्य बच्चों को केवल नौकरी पाने लायक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें एआइ के युग में साहसी, जिज्ञासु और चेतनशील इंसान बनाना है. थियेटर और फिल्म मेकिंग से बच्चों में आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है. श्रीमती अग्रवाल ने कहा कि फिनलैंड और सिंगापुर के शिक्षा मॉडल से प्रभावित होकर इसे लॉन्च किया गया है.

ये हुए बदलाव

अंकों की जगह मास्टरी :

अब बच्चों का मूल्यांकन केवल नंबरों से नहीं, बल्कि विषय की पूर्ण समझ के आधार पर होगा.

लेक्चर्स की जगह लैब्स :

पारंपरिक ब्लैकबोर्ड पढ़ाई के बजाय अब व्यावहारिक प्रयोगों और लैब्स पर अधिक ध्यान दिया जायेगा.

परीक्षाओं की जगह रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम :

रट्टा मारकर परीक्षा देने के बजाय बच्चों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को हल करना सिखाया जा रहा है.

विज्ञापन
SANJAY PRASAD

लेखक के बारे में

By SANJAY PRASAD

SANJAY PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola