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झारखंड के EX CM रघुवर दास बोले- नियुक्ति वर्ष घोषित कर नौकरियां देना भूल गयी हेमंत सरकार

Jharkhand News (जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम) : झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने सीएम हेमंत सोरेन को घेरा है. पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित कर सरकार बेरोजगारों को रोजगार देना सरकार भूल गयी. अभी तक हेमंत सरकार नयी नियमावली नहीं बना पायी है.

Jharkhand News (जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम) : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरा है. पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित कर सरकार बेरोजगारों को रोजगार देना सरकार भूल गयी. अभी तक हेमंत सरकार नयी नियमावली नहीं बना पायी है. एक माह में नियमावली में सुधार (आपके अनुसार सुधार की जरूरत है) का दावा भी अब पूरा होता नहीं दिख रहा है.

पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा कि इसी प्रकार पंचायत सचिव, सहायक पुलिस, पारा शिक्षक आदि हर कोई आंदोलन करने को मजबूर हैं. पारा शिक्षकों के मामले में तो नियमावली, वेतनमान, कल्याण कोष के गठन समेत अन्य चीजों का उनकी सरकार ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया था, अब केवल जरूरत है, उसे कैबिनेट में लाकर पारित करने की. सरकार की नीयत युवाओं को रोजगार देने की नहीं लगती है. बड़े-बड़े वादे कर सत्ता हासिल कर लिया और अब झारखंड के युवाओं को छलने का काम कर रहे हैं. अबुआ राज में कब तक झारखंडवासी छले जायेंगे.

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघवुर दास ने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि 5 लाख सालाना रोजगार देने के वादे से आयी हेमंत सरकार लोगों को नये रोजगार तो दे नहीं पा रही है, बल्कि जिन्हें रोजगार मिला हुआ है, उनसे रोजगार छीनने में लगी है. उन्होंने सवाल किया कि क्या झारखंडवासियों को झारखंड में रोजगार करने का अधिकार नहीं है.

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केवल इसलिए कि उन्हें भाजपा के शासनकाल में रोजगार मिला. उनकी लड़ाई भाजपा से होनी चाहिए, इन युवाओं से नहीं. सीएम हेमंत सोरेन से आग्रह करते हुए रघुवर दास ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई में इन युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर इन्हें रोजगार दें. जिन्हें वे रोजगार नहीं दे पा रहे हैं, वैसे नौजवानों को अपने वादे के अनुसार रोजगार भत्ता दें.

श्री दास ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में स्थानीय नौजवानों को नौकरी में प्राथमिकता देने के उद्देश्य से हाई स्कूल टीचर के 17,572 पदों पर रिक्तियां निकालीं. वर्ष 2018 में परीक्षाफल आया और वर्ष 2019 में नियुक्तियां शुरू हुई. उनकी सरकार के कार्यकाल में लगभग 90 प्रतिशत पदों पर बहाली हो गयी. केवल इतिहास और नागरिकशास्त्र विषय के 626 सफल अभ्यार्थियों को नियुक्ति की जानी थी. इनकी नियुक्ति की अनुशंसा भी हो गयी है. केवल नियुक्ति पत्र दिया जाना है.

शिक्षा विभाग ने 18 फरवरी, 2021 को इनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी, जबकि 11 गैर अनुसूचित जिलों में से देवघर में नियुक्तियां की जा चुकी है. अपनी नियुक्तियों के लिए ये सफल अभ्यार्थी हाई कोर्ट की शरण में गये, तो कोर्ट ने 11 फरवरी 2021 को शिक्षा विभाग को 6 सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश दिया था.

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उस समय सोनी कुमारी वाले मामले की आड़ में शिक्षा विभाग ने 18 फरवरी को इनकी नियुक्ति पर कार्मिक विभाग को पत्र लिख कर रोक लगवा दी. इस बीच सरकार के एक अपरिपक्व निर्णय के कारण हाई स्कूल में नौकरी पाये झारखंडवासियों की नौकरी पर संकट आ गया. इसके खिलाफ सोनी कुमारी व अन्य अभ्यार्थी ने सुप्रीम कोर्ट तक गयी.

9 जुलाई, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने 13 अनुसूचित जिले व 11 गैर अनुसूचित जिलों में हुई बहाली को सही ठहराया दिया. इसके बाद इतिहास व नागरिकशास्त्र के सफल अभ्यार्थियों के साथ बाकी नियुक्तियों का भी रास्ता साफ हो गया, बावजूद सरकार इन्हें नियुक्ति पत्र देने में आनाकानी कर रही है.

Posted By : Samir Ranjan.

Prabhat Khabar Digital Desk
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