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जमशेदपुर लोकसभा चुनाव: 2019 में विद्युतवरण महतो व समीर मोहंती थे साथ-साथ, 2024 के चुनावी रण में हैं एक-दूसरे के खिलाफ

जमशेदपुर लोकसभा सीट पर 25 मई को वोटिंग है. 2019 में विद्युतवरण महतो व समीर मोहंती साथ-साथ थे. उनके बीच मित्रवत संबंध थे. 2024 के चुनावी रण में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं.

जमशेदपुर, संजीव भारद्वाज: जमशेदपुर लोकसभा सीट पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होगा. वर्ष 2024 के चुनाव में जमशेदपुर सीट से 25 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. यहां 18.69 लाख मतदाता हैं, जिसमें पुरुषों की संख्या 9,37,412 और महिला मतदाताओं की संख्या 9,31,733 है. इस सीट पर एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है. एनडीए से भाजपा प्रत्याशी विद्युत वरण महतो जीत की हैट्रिक लगाने के लिए चुनावी अभियान में किसी तरह कमी नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं, इंडी गठबंधन के प्रत्याशी सह बहरागोड़ा से झामुमो विधायक समीर मोहंती उन्हें रोकने और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कमर कसर मेहनत कर रहे हैं. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में विद्युत वरण महतो और समीर मोहंती के बीच मित्रवत संबंध थे, लेकिन 2019 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद समीर मोहंती 2024 के लोकसभा चुनाव में विद्युत वरण महतो के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनकर खड़े हो गये हैं. वर्ष 2009 में बहरागोड़ा से विधायक रहते विद्युत वरण महतो ने जमशेदपुर से 2014 का लोकसभा चुनाव जीता था. बहरागोड़ा टू दिल्ली के सफर में स्थानीय विधायक समीर मोहंती ने भी जमशेदपुर लोकसभा सीट पर तीर-कमान को लहराने का फैसला कर लिया है. झामुमो प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद समीर मोहंती ने कहा था कि उन्होंने विद्युत वरण महतो से राजनीति सीखी और मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन उनके राजनीतिक गुरु हैं.

दोनों बहरागोड़ा विधानसभा से रहे हैं विधायक

भाजपा प्रत्याशी विद्युत वरण महतो और झामुमो उम्मीदवार समीर मोहंती को राजनीति विरासत में नहीं मिली है. दोनों प्रत्याशियों ने विधानसभा चुनाव लड़ा, हारे फिर उन्हें जनप्रतिनिधि बनने का मौका मिला. दोनों की जीत सुनिश्चित करने के लिए दोनों दलों के स्टार प्रचारक जनसभा भी कर चुके हैं. भाजपा प्रत्याशी के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मऊभंडार में सभा की, जबकि, समीर मोहंती के लिए मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कल्पना सोरेन और आप के सांसद संजय सिंह भी रैली कर चुके हैं.

दोनों के विकास, सिंचाई, बेरोजगारी, बंद खदान और एयरपोर्ट चुनावी मुद्दा

दोनों प्रत्याशी अपनी-अपनी सरकार के कार्यकाल में क्षेत्र में हुए विकास के दावे कर रहे हैं. इस बार के चुनाव में विकास, सिंचाई, बेरोजगारी, बंद खदान और एयरपोर्ट मुद्दा है. जमशेदपुर लोकसभा सीट पर पिछले दो चुनाव से झामुमो चुनाव लड़ रहा है और सहयोगी दल उसे समर्थन दे रहे हैं. 2019 के चुनाव में सिंहभूम सीट जब कांग्रेस के खाते में गयी, तो झामुमो ने जमशेदपुर की सीट पर दावा ठोक दिया. साथ ही प्रत्याशी के रूप में पार्टी के वरीय नेता चंपाई सोरेन को चुनाव मैदान में उतार दिया. 2024 के चुनाव के पहले ही झामुमो के नेतृत्ववाली झारखंड की सरकार के स्थानीय विधायक, मंत्री व पार्टी के वरीय नेताओं ने कोल्हान की दोनों सीटों (सिंहभूम और जमशेदपुर) पर मजबूती के साथ अपना दावा किया था. कांग्रेस पार्टी की इच्छा थी कि सिंहभूम सीट झामुमो को दी गयी है, तो जमशेदपुर सीट कांग्रेस को मिले. कांग्रेस पार्टी के संभावित प्रत्याशी के रूप में पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार का नाम लगातार चर्चा में रहा, लेकिन जमशेदपुर से अचानक उनकी सक्रियता कम होने के कारण कांग्रेस का जमशेदपुर सीट पर दावा भी कमजोर पड़ गया, इसका लाभ झामुमो ने उठाया और बहरागोड़ा के विधायक समीर मोहंती को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया.

जमशेदपुर की छह विधानसभा में से चार पर झामुमो का कब्जा

जमशेदपुर लोकसभा सीट पर झामुमो का दावा इसलिए भी मजबूत बना कि इसकी छह विधानसभा सीटों में से चार पर झामुमो और एक पर उसके सहयोगी कांग्रेस के विधायक हैं. जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी व तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास को उन्हीं की सरकार में मंत्री रहे सरयू राय ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पराजित किया था.

जमशेदपुर सीट कब किसके खाते में
वर्ष – प्रत्याशी – पार्टी
1952 – भजोहरि महतो – लोक सेवक संघ (मानभूम साउथ धालभूम लोकसभा सीट)
1957 – मोहिंद्र कुमार घोष – कांग्रेस
1962 – उदय कर मिश्रा – भाकपा
1967 – एससी प्रसाद – कांग्रेस
1971 – सरदार स्वर्ण सिंह – कांग्रेस
1977 – रुद्र प्रताप षाड़ंगी – बीएलडी
1980 – रुद्रप्रताप षाड़ंगी – जेएनपी
1984 – गोपेश्वर – कांग्रेस
1989 – शैलेंद्र महतो – झामुमो
1991 – शैलेंद्र महतो – झामुमो
1996 – नीतीश भारद्वाज – भाजपा
1998 – आभा महतो – भाजपा
1999 – आभा महतो भाजपा
2004 – सुनील कुमार महतो – झामुमो
2007 – सुमन महतो – झामुमो
2009 – अर्जुन मुंडा – भाजपा
2011 – डॉ अजय कुमार – झाविमो
2014 – विद्युत वरण महतो – भाजपा
2019 – विद्युत वरण महतो -भाजपा

संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीट

जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीट हैं. इनमें बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका व जुगसलाई से झामुमो के विधायक हैं, जबकि जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय और जमशेदपुर पश्चिमी से कांग्रेस के विधायक हैं. घाटशिला, पोटका सीट एसटी तथा जुगसलाई एससी के लिए आरक्षित है, जबकि बहरागोड़ा, जमशेदपुर पूर्वी व पश्चिमी की सीट सामान्य कोटि के हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 में मतदाताओं की संख्या

विधानसभा – कुल संख्या
बहरागोड़ा – 2,41,093
घाटशिला – 2,56,695
पोटका – 3,11,099
जुगसलाई – 3,47,592
जमशेदपुर पूर्वी – 3,31,306
जमशेदपुर पश्चिमी – 3,81,493
कुल मतदाता : 18,69,278
पुरुष – 9,37,412
महिला – 9,31,733
थर्ड जेंडर – 133

विद्युत वरण महतो के नाम है सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड

वर्ष 2019 के लोकसभ चुनाव में जमशेपुर सीट से भाजपा प्रत्याशी विद्युत वरण महतो लगातार दूसरी बार सांसद चुने गये. उन्होंने 2014 में मिली जीत के अंतर को तीन गुना बढ़ा दिया. 2014 के चुनाव में उन्होंने तत्कालीन सांसद डॉ अजय कुमार को 99,876 मतों से हराकर सीट छीनी थी, वहीं, अपनी धमक इस सीट पर मजबूत करते हुए 2019 के चुनाव में मौजूदा मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को 3,02,090 मतों से पराजित किया. सांसद विद्युत वरण महतो को 6,79,632 (59.39%) मत मिले, जबकि झामुमो प्रत्याशी रहे चंपाई सोरेन को 3,77,542 (32.99%) मत से ही संतोष करना पड़ा था. इन दोनों प्रत्याशियों को छोड़कर अन्य 19 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी. जमशेदपुर में 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करनेवाले झामुमो के सांसद शैलेंद्र महतो ने पहली बार दो लाख के मतों का आंकड़ा पार किया था.

विद्युत वरण महतो जीते, तो भाजपा लगायेगी दूसरी हैट्रिक

जमशेदपुर लोकसभा सीट पर अब तक 18 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, इनमें सबसे अधिक छह बार भाजपा ने यहां से जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस-झामुमो ने चार-चार, सीपीआइ, बीएलडी, जनता पार्टी व भोजोहरि महतो ने एक-एक बार जीत हासिल की है. भाजपा ने इस सीट पर अपना परचम फहराने के लिए महाभारत सीरियल के चर्चित किरदार श्रीकृष्ण नीतीश भारद्वाज को प्रत्याशी बनाकर भेजा था. नीतीश भारद्वाज ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार रहे बिहार जनता दल के कद्दावर नेता सह तत्कालीन मंत्री इंदर सिंह नामधारी को 95,650 मतों से पराजित किया था.

भाजपा लगा चुकी है जीत की हैट्रिक

जमशेदपुर लोकसभा सीट पर भाजपा ही एकमात्र ऐसा दल है, जो हैट्रिक (1996, 98 ,99) लगा चुका है. 1996 में भाजपा से नीतीश भारद्वाज और 1998 व 99 में आभा महतो ने जीत दर्ज की थी. 2009 में अर्जुन मुंडा, 2014-19 में विद्युत वरण महतो ने जीत हासिल की. व्यक्तिगत प्रत्याशी के रूप में रुद्र प्रताप षांडगी (1977-80), शैलेंद्र महतो (1989-91), आभा महतो (1998-99) और विद्युत महतो (2014-19) ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने दो-दो बार जीत हासिल की है. इस बार भाजपा के विद्युत वरण महतो जीत दर्ज करते हैं, तो वे पहले प्रत्याशी होंगे, जो जमशेदपुर सीट पर व्यक्तिगत प्रत्याशी के रूप में हैट्रिक लगायेंगे.

प्रत्याशियों के बोल

स्थिर, मजबूत व भरोसेमंद सरकार के लिए मोदी का पीएम बनना जरूरी : विद्युत वरण महतो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विश्व का सिरमौर बनता दिख रहा है. देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन तक पहुंच गयी है. विश्व में भारत का नाम और पहचान बन चुका है. भारतीय पासपोर्ट की वैल्यू बढ़ गयी है. नौकरी व पढ़ाई के लिए विदेश जानेवालों को अब परेशानी नहीं आ रही है. विदेश में किसी परेशानी में पड़ जानेवाले या उक्रेन जैसे युद्ध में फंसे भारतीयों को किस तरह निकाला गया, यह पीएम मोदी की मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिचायक है. स्थिर, मजबूत और भरोसेमंद सरकार के लिए फिर से नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना जरूरी है. जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में काफी काम किया है. सड़कों का जाल बिछाया, एनएच 33 पारडीह पर कॉरिडोर बन रहा है. जुगसलाई आरओबी का निर्माण रघुवर सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ. एयरपोर्ट व माइंस मामले में राज्य सरकार ने पेच फंसाया.

400 पार सीट आने पर संविधान और आरक्षण खत्म कर देगी भाजपा : समीर मोहंती

भाजपा 400 सीटों का टारगेट इसलिए सेट कर रही है, क्योंकि उसे संविधान को बदल कर देश को अपने कब्जे में कर लेना है. संविधान बदल कर भाजपा एससी-एसटी-ओबीसी का आरक्षण पूरी तरह से समाप्त कर देगी. भाजपा ने सिर्फ हिंदू-मुस्लिम कर देश को भटकाने का काम किया है. देश में महंगाई, बेरोजगारी चरम पर है. नौकरियां नहीं मिल रही हैं. चंद लोग करोड़ों रुपये लेकर ऐश कर रहे हैं, करोड़ों लोगों को दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है. जमशेदपुर में सांसद विद्युत वरण महतो के पास गिनाने के लिए एक काम नहीं है. एयरपोर्ट जब धालभूमगढ़ में बनना ही नहीं था, तो उसके लिए लोगों को सब्जबाग क्यों दिखाया गया? पीएम मोदी को यदि इतनी ही जमशेदपुर की चिंता थी, तो चुनावी दौरे के अलावा नौ साल में वे घाटशिला या जमशेदपुर के दौरे पर क्यों नहीं आये.

क्या कहती हैं राजनीतिक विश्लेषक

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जमशेदपुर लोकसभा चुनाव: 2019 में विद्युतवरण महतो व समीर मोहंती थे साथ-साथ, 2024 के चुनावी रण में हैं एक-दूसरे के खिलाफ 2


युवा और महिला मतदाता करेंगे प्रत्याशी के भाग्य का फैसला : डॉ त्रिपुरा झा
जमशेदपुर की जनता यह देख रही है कि उन्हें किस प्रत्याशी से स्थानीय और किससे राष्ट्रीय फलक पर लाभ मिल सकता है. दोनों ही प्रत्याशियों के पास जनप्रतिनिधि होने का अपना-अपना अनुभव है. जनता इस बात की अवश्य पड़ताल करेगी कि जमशेदपुर से सांसद रहते विद्युत वरण महतो और बहरागोड़ा से विधायक रहते समीर मोहंती ने अपने-अपने क्षेत्र में विकास के क्या-क्या काम किये हैं. 2024 के चुनाव में राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दे, 10 सालों में मोदी सरकार के विकास कार्यों, प्रधानमंत्री पद पर मोदी का नेतृत्व, इंडी गठबंधन के पास प्रधानमंत्री पद की अनिश्चितता और झारखंड में लगातार भ्रष्टाचार के मामलों के उजागर होने जैसे मुद्दे भी प्रत्याशियों के भविष्य तय करेंगे. झारखंड की राजनीति में नोटों के पहाड़ मिलने का सीधा कनेक्शन जमशेदपुर से भी रहा है, इसलिए यह भी मुद्दा बना हुआ है. इन मुद्दों के अलावा कुछ क्षेत्रीय एवं स्थानीय मुद्दे भी प्रभावी होंगे. प्रत्याशियों की जीत-हार का सारा दारोमदार गैर-जनजाति, युवा एवं महिला मतदाताओं पर होगा.

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