दबंग कर रहे हुरलुंग पंचायत के सबर परिवारों की रैयती जमीनों पर कब्जा, विरोध करने पर रास्ते से हटाने की धमकी

Author Dashmat Soren|Edited by Sweta Vaidya
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दबंग कर रहे हुरलुंग पंचायत के सबर परिवारों की रैयती जमीनों पर कब्जा, विरोध करने पर रास्ते हटाने की धमकी

अस्तित्व पर संकट मंडरता देख सोमवार सबर समाज ने लुपुगडीह मौजा के सबर टोला में बैठक की | Prabhat Khabar Network

जमशेदपुर के लुपुगडीह में सबर आदिम जनजाति की रैयती जमीन पर दबंगों ने किया कब्जा। ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा और हस्तक्षेप की मांग की है।

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जमशेदपुर. जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत लुपुगडीह मौजा के सबर टोला में विलुप्त प्राय आदिम जनजाति के सबर परिवारों को उनकी रैयती जमीन से बेदखल करने का मामला प्रकाश में आया है. दबंग व कुछ प्रभावशाली लोग डरा-धमकाकर उनकी रैयती जमीन को कब्जा कर रहे हैं. इसका विरोध करने पर उन्हें रास्ते से हटाने की धमकी दी जा रही है. इस पर सबर परिवारों में भय का माहौल है.

अस्तित्व पर मंडराते संकट को देखते हुए सोमवार को हुरलुंग पंचायत के सबर टोला में भूमि संबंधी समस्याओं को लेकर सबर समाज की बैठक हुई. इसमें आदिम जनजाति के नेता सुकलाल पहाड़िया विशेष रूप से शामिल हुए. बैठक में सबर परिवारों ने अपने साथ हो रहे जुल्मों की जानकारी दी. कहा कि यदि यही स्थिति रही, तो उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन से वंचित होना पड़ेगा.बैठक में सबर परिवारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, राशन, रोजगार एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी समस्याओं से भी अवगत कराया. सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि अब तक सबर परिवार चुप रहते थे, लेकिन अब अस्तित्व को बचाने के लिए अपना आवाज बुलंद करेंगे. सबर परिवारों की आवाज को संबंधित विभाग व जिला प्रशासन के समक्ष भी उठाया जायेगा. इस अवसर पर गुरुदेव सबर, विराज सबर, गंगामुनी सबर, सावित्री सबर, संजय सबर, सुनील सबर, सुशील सबर, माधुरी सबर, छतर पहाड़िया समेत काफी संख्या में सबर समाज के लोग मौजूद थे.

ग्रामसभाओं और आदिवासी संगठनों के सहयोग से जनांदोलन होगा : सुकलाल पहाड़िया

सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि विकास की मुख्यधारा से पहले ही पिछड़े सबर समाज की पुश्तैनी और रैयती जमीनों पर कब्जे की कोशिश उनके अस्तित्व, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से जिन जमीनों पर सबर परिवार खेती और निवास करते आ रहे हैं, उन्हें उनसे छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जायेगी. यह केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि आदिम जनजाति के अधिकारों के हनन का गंभीर मामला है. उन्होंने प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामसभाओं और आदिवासी संगठनों के सहयोग से जनांदोलन शुरू किया जायेगा.


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