वर्तमान दौर में क्यों जरूरी है रामचरितमानस? VBU में कुलपति ने बताये संदेश और जीवन के आदर्श

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भाषण प्रतियोगिता में तृतीय स्थान पर रही नम्रता कुमारी विश्वकर्मा और शिक्षक

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में 'वर्तमान संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासंगिकता' विषय पर अंतर-विभागीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने रामचरितमानस के सार्वभौमिक संदेश पर प्रकाश डाला.

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हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में मंगलवार को तुलसी सप्ताह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर अंतर-विभागीय भाषण प्रतियोगिता भी हुई. प्रतियोगिता का विषय 'वर्तमान संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासंगिकता' था. इसमें विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया.

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने कहा कि तुलसीदास का साहित्य किसी एक पंथ विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का साहित्य है. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में वर्णित श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने की आवश्यकता है. इसके साथ ही राम जैसी शालीनता और मर्यादा को बनाए रखना भी जरूरी है.

तुलसी साहित्य लोकमंगल का साहित्य : विभागाध्यक्ष

हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध सिंह ने कहा कि तुलसीदास का साहित्य मूल रूप से लोकमंगल का साहित्य है. उन्होंने कहा कि तुलसी साहित्य आज भी समाज को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का काम करता है.

डॉ. केदार सिंह ने कहा कि तुलसीदास ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को मानवीय मूल्यों और जीवन के आदर्शों से जोड़ने का कार्य किया. मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. सैयद जैन उल हक ने कहा कि राम केवल किसी एक भाषा या पंथ के नायक नहीं हैं. वे संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सांस्कृतिक नायक हैं.

ऋतु राव प्रथम, राहुल कुमार द्वितीय

भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. देवनारायण राम, शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. मृत्युंजय प्रसाद और अंग्रेजी विभाग के डॉ. नीरज डांग शामिल थे.

प्रतियोगिता में शिक्षाशास्त्र विभाग की ऋतु राव ने प्रथम, राजनीति विज्ञान विभाग के राहुल कुमार ने द्वितीय और नम्रता कुमारी विश्वकर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. मिष्टी कुमारी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. अन्य सभी प्रतिभागियों को सहभागिता सम्मान प्रदान किया गया.

कार्यक्रम में डॉ. सुकल्याण मोइत्रा, डॉ. गंगानंद सिंह, डॉ. विजय कुजूर, डॉ. राजकुमार चौबे, डॉ. अमित कुमार सिंह समेत विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे.


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