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Karma Puja 2021 : करमा पूजा को लेकर बहनें पहुंचने लगी मायके, अंतिम चरण में अखड़ा में तैयारी

झारखंड में करमा पूजा की तैयारी अंतिम चरण में है. करमा पूजा को लेकर आदिवासी समितियों का गाइडलाइन भी आया है. इस पर्व को लेकर हजारीबाग के बड़कागांव की बहनें अपनी मायके पहुंच रही है. 16 सितंबर को संजोत पूजा और 17 सितंबर को करमा पूजा है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
करमा पर्व में करम डाल के आसपास नृत्य करती बहनें.
करमा पर्व में करम डाल के आसपास नृत्य करती बहनें.
फाइल फोटो.

Jharkhand News (संजय सागर, बड़कागांव, हजारीबाग) : भाई-बहनों का त्योहार करमा एवं एकादशी पर्व की तैयारी में लोग जुट गये हैं. हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव में करीब 5000 अखड़ों में कर्म की पूजा होगी. विवाहित बहनें अपने -अपने ससुराल से करमा पूजा करने के लिए बड़कागांव मायके पहुंचने लगी है. इनदिनों सुबह- शाम लोकगीत व करमा गीत से क्षेत्र गुंजयमान हो रहा है. विवाहित बहनें सुबह-शाम करमा गीत... यही खेल खेलेंगे नैहरा में, एकादशी करम में... रुनु-झुनू घंटियां बजे रे भइया सक्षम... गोड़ा-तोरा लागी हिइयो धरती मइया है, हमर जावा रक्षा करया है धरती मइया... आदि गीतों से क्षेत्र गूंज रहा है.

16 सितंबर को संजोत पूजा होगी

करमा पर्व एवं एकादशी करने वाले भाई-बहन संजोत के दिन नदियों में जाकर स्नान करेंगे. इसके बाद अपने -अपने करम के अखड़ों में पूजा-अर्चना करेंगे. संजोत के दिन भाई-बहनें करमा के जावा को 5 बार परिक्रमा कर जगायेंगे. करमा गीत वालों के गीत के साथ नृत्य करेंगे. वहीं, 17 सितंबर को भाई- बहन उपासना करेंगे. 7 बार जावा को जगायेंगे एवं पूजा-अर्चना करेंगे. शाम में फुल लोहरन करेंगे. यानी धान के खेतों में जाकर विभिन्न तरह के फूल व पौधों को तोड़ कर लायेंगे. खीरा, ककड़ी ,चना सहित विभिन्न तरह के फल को इकट्ठा करेंगे.

देर शाम तक अखड़ों में करम की डाली लगायी जायेगी. इसके बाद लोक कथा व लोकगीत के साथ भाई-बहनें पूजा करेंगे. पूजा के दौरान भाई-बहन एक दूसरे से पूछेंगे किसका कर्म अपना कर्म भैया का धर्म... तब एक-दूसरे से खीरा से पीठ में ठोकेंगे.

बड़कागांव के चटाईया देवल भुइयां एवं उसका पोता जितेन राम रात एक बजे डुमारो गुफा जाकर कादो का फूल तोड़ कर लायेंगे. 2 दिनों तक ढोल, मांदर व नगाड़ा के साथ झूमर नृत्य हर अखाड़ों में किये जायेंगे. इसके बाद 18 सितंबर को बड़कागांव के हर अखड़ा में वे दोनों फूल पहुंचायेंगे. सुबह में दोबारा भाई-बहन पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद नदी व तालाबों में करम की डाल को विसर्जन करेंगे.

Posted By : Samir Ranjan.

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