बड़कागांव के इसको गुफा को संरक्षण की जरूरत, मिटती जा रही है रॉक पेंटिंग का अस्तित्व

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Jharkhand news, Hazaribagh news : हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड स्थित नापोकला पंचायत में विश्वप्रसिद्ध पाषाण कालीन इसको गुफा है. इस गुफा की खोज सितंबर 1991 को हजारीबाग के बूलू इमाम ने की थी. उस समय पुरातात्विक विभाग के अधिकारियों ने भी इस गुफा का दौरा किया था. इस गुफा की खोज किये हुए आज 20 साल गुजरने को ह���. गुफा का संरक्षण एवं सुंदरीकरण की आवश्यकता है. गुफा के आर्ट गैलरी में पीसीसी पथ बनाया गया है, लेकिन गुफा तक जाने के लिए जर्जर सड़क है. इस गुफा के शैल दीर्घा में उकेरी शैलचित्र का अस्तित्व धीरे- धीरे मिटता जा रहा है. साहित्यकार विनोद कुमार राज विद्रोही का कहना है कि पुरातात्विक विज्ञान का स्रोत है यह गुफा. अध्ययन के दृष्टिकोण से भारतवर्ष के लिए यह गुफा काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.

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Jharkhand news, Hazaribagh news : बड़कागांव (संजय सागर) : हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड स्थित नापोकला पंचायत में विश्वप्रसिद्ध मध्यपाषाण कालीन इसको गुफा है. इस गुफा की खोज सितंबर 1991 को हजारीबाग के बूलू इमाम ने की थी. उस समय पुरातात्विक विभाग के अधिकारियों ने भी इस गुफा का दौरा किया था. इस गुफा की खोज किये हुए आज 20 साल गुजरने को है. गुफा का संरक्षण एवं सुंदरीकरण की आवश्यकता है. गुफा के आर्ट गैलरी में पीसीसी पथ बनाया गया है, लेकिन गुफा तक जाने के लिए जर्जर सड़क है. इस गुफा के शैल दीर्घा में उकेरी शैलचित्र का अस्तित्व धीरे- धीरे मिटता जा रहा है. साहित्यकार विनोद कुमार राज विद्रोही का कहना है कि पुरातात्विक विज्ञान का स्रोत है यह गुफा. अध्ययन के दृष्टिकोण से भारतवर्ष के लिए यह गुफा काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.

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शैलचित्र की विशेषता

इसको गांव के समीप अवसारा पहाड़ी श्रृंखला के सती पहाड़ पर शेषनाग क्षत्र की आकृति वाली शैल दीर्घा है. इसकी लंबाई लगभग 100 मीटर है. शैल दीर्घा में चित्र लिपि है. 100 मीटर लंबी विशाल चट्टान में 500 फुट तक काफी चित्र लिपि अंकित है. इन चित्रों में आदमी, गाय, हिरण, खरगोश, नदियां, सूरज, ईश्वर आदि के चित्र अंकित है. चट्टान की ऊंचाई 26 फुट है. विशालकाय शैल दीर्घा को रक्तिम लौह के हेमेटाइट को कूट- कूट एवं पीसकर तैयार किये गये रंग से रंगा भी गया है. चित्रों में कहीं-कहीं चुने अथवा पत्थरों से निर्मित सफेद रंग का भी प्रयोग किया गया है.

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प्राचीन गुफा की विशेषता

इसको की शैलदीर्घा के ऊपर विशाल विस्तृत चट्टान के छत के नीचे विशाल गुफा है. यह गुफा का विस्तृत चट्टान लगभग 6 एकड़ में फैला हुआ है. शैलदीर्घा में बनाये गये चित्र के अनुसार यह वही सूर्य मंदिर हो सकता है. इस मंदिर के 100 से अधिक स्तंभ अभी भी इस गुफा में है. स्तंभों के अवशेष और प्रकृति निर्मित वेदियां इस विशाल मंदिर रूपी गुफा में अतुलनीय विशेषताएं हैं. इस गुफा की ऊंचाई लगभग 20 -30 फीट है.

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इस गुफा के पश्चिमी छोर पर दर्शक दीर्घा से युक्त एक मुक्त मंच भी है, जिसके केंद्र में 5 इंच व्यास का एक छेद है, जो 12 इंच गहरा है. यह मुक्त मंच भी मंदिर का एक भाग हो सकता है जहां सामूहिक कृत्य संपन्न होते होंगे. शैलदीर्घा में नदी की भी चित्रलिपि है. उस लिपि के अनुसार इस गुफा के काफी दूरी में दामोदर नदी के रूप में पहचान की गयी है. इस गुफा की सभ्यता को दामोदर घाटी सभ्यता का नाम दिया गया है. शैलचित्रों के अनुसार, यहां 24 नगर होंगे. यह गुफा राजधानी के रूप में होगी. बड़कागांव प्रखंड के चारो ओर छोटे- बड़े दर्जनों गुफाएं हैं.

पत्थरों के औजार भी मिले

इस गुफा में हैमर (फेंककर चोट पहुंचाने के लिए), हैंड (काटने- कूदने के लिए), भाले की नोक (चमड़ा छिलने के लिए) एवं माइक्रोलिथ छोटे और धारदार चाकू आदि औजार सम्मिलित है.

Posted By : Samir Ranjan.

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