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मातृ दिवस पर विशेष : मां के संघर्ष ने बनाया बेटी को डॉक्टर और बेटे को शिक्षक

Updated at : 11 May 2024 8:06 PM (IST)
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मातृ दिवस पर विशेष : मां के संघर्ष ने बनाया बेटी को डॉक्टर और बेटे को शिक्षक

मां न सिर्फ जीवनदायिनी है, बल्कि वह परिवार के हर सुख-दुख की साथी भी है.

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बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद मां ने कमान संभाली

जानिए बड़कागांव की कई माताओं की सफलता की कहानी

संजय सागर, बड़कागांव

मां न सिर्फ जीवनदायिनी है, बल्कि वह परिवार के हर सुख-दुख की साथी भी है. आज एक ऐसी मां की कहानी से रू-ब-रू करा रहे हैं, जिसने खुद के संघर्ष से बच्चों को इस काबिल बनाया कि अब पूरे परिवार को उनपर नाज है. खुद एएनएम रहते हुए बेटी को डॉक्टर बना दिया. मेहनत-मजदूरी कर दोनों बेटे को शिक्षक बना दिया. हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में कई ऐसी माताएं हैं, जो अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. बड़कागांव अस्पताल रोड स्थित दाता बाबा के पास एएनएम मंजु कुमारी 1992 से लेकर अब तक एएनएम का काम कर रही हैं. हरली स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम के रूप में कार्य कर रही हैं. इनकी कहानी है कि पिता मौला राम कुशवाहा ड्रेसर थे. उन्होंने मंजु को पढ़ा-लिखा कर एएनएम बनाया. इसके बाद मंजु ने अपनी पुत्री को अपने से बड़े पद पर यानी डॉक्टर बनाने की ठान ली. उन्होंने बताया कि मैं अपनी बेटी डॉ अनामिका दीप को डॉक्टर बनने के लिए हर प्रयास करने लगी. पुत्री अनामिका दीप एनएमसीएच, बिहार से की है. वर्ष 2020 में एमबीबीएस कंप्लीट किया. वर्ष 2023 में जेपीएससी पास कर अनामिका दीप डॉक्टर बन गयी और फिलहाल बड़कागांव अस्पताल में सेवा दे रही है. बेटा भी डॉक्टर बनने के लिए मेहनत कर रहा है. आकाश दीप फिलहाल नीट का परीक्षा लिखे हैं. दूसरी कहानी है कि बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद मां ने कमान संभाली और मजदूरी कर बच्चों की पढ़ाई पूरी करायी. आज दोनों बेटे पढ़-लिखकर शिक्षक बन गये हैं. बड़कागांव आंबेडकर मोहल्ला की मो सोमरी देवी पति कारू राम की मौत के बाद खुद मजदूरी कर अपने दो बेटों को शिक्षक बना दिया. बड़कागांव मुख्य चौक स्थित किरण गुप्ता पति जेठू गुप्ता के निधन के बाद खुद होटल चलाकर अपने बच्चों कुंदन गुप्ता और रौशन गुप्ता को बिजनेसमैन बना दिया. आज वह सफल व्यवसायी कहलाते हैं. आंगनबाड़ी सेविका मालती कुमारी अपनी पुत्री आकांक्षा कुमारी को पढ़ाकर कोल माइंस का इंजीनियर बना दिया. आज आकांक्षा कुमारी भारत की प्रथम कोल माइंस इंजीनियर के रूप में जानी जाती है.

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