झारखंड में मार्च 2022 तक 7.50 लाख घरों तक पहुंचेगा पाइप से पानी, 2024 तक हर घर जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित

Jharkhand news (रांची) : वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए जल जीवन मिशन की वार्षिक कार्य योजना पेश की गयी. झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने जल शक्ति मंत्रालय की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय समिति के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्य योजना पेश की. इस दौरान वर्ष 2022 तक 7.50 लाख घरों में पाइप लाइन से पानी पहुंचने की बात कही गयी. वहीं, वर्ष 2024 तक 'हर घर जल' लक्ष्य को प्राप्त करने की बात कही.
Jharkhand news (रांची) : वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए जल जीवन मिशन की वार्षिक कार्य योजना पेश की गयी. झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने जल शक्ति मंत्रालय की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय समिति के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्य योजना पेश की. इस दौरान वर्ष 2022 तक 7.50 लाख घरों में पाइप लाइन से पानी पहुंचने की बात कही गयी. वहीं, वर्ष 2024 तक ‘हर घर जल’ लक्ष्य को प्राप्त करने की बात कही.
बता दें कि झारखंड में 58.95 लाख ग्रामीण परिवार हैं. इनमें से 7.40 लाख (12.6 प्रतिशत) के पास नल जल आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है. अगस्त, 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा के बाद से लेकर अब तक राज्य में 4 लाख से अधिक नल जल कनेक्शन प्रदान किये गये हैं. राज्य में अब तक केवल 315 गांवों को ही ‘हर घर जल’ गांव घोषित किया गया है. इसका मतलब है कि इन गांवों के हर घर में नल जल आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है.
जल जीवन मिशन की वार्षिक कार्य योजना के दौरान राज्य से आग्रह किया गया है कि 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत राज्य में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे आकांक्षी जिलों और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों सहित सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में पाइप के माध्यम से जलापूर्ति करने पर अधिक जोर दिया जाये.
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झारखंड को वित्तीय वर्ष 2020-21 में ग्रामीण क्षेत्रों में सुनिश्चित नल जल आपूर्ति प्रदान करने के लिए 572.24 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया. हालांकि, इस कार्य के लिए झारखंड सरकार की ओर से केवल 143 करोड़ रुपये की ही निकासी हो सकी है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में झारखंड को जल जीवन मिशन के अंतर्गत विभिन्न कार्यों की शुरुआत करने के लिए केंद्रीय अनुदान के रूप में लगभग 1400 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है.
बता दें कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत मनरेगा, एसबीएम, पीआरआई को 15वें वित्त आयोग के अनुदान, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के कन्वर्जेंस द्वारा सभी उपलब्ध संसाधनों को एक साथ जोड़ने के प्रयास किये जाते हैं. इस दौरान समिति ने सुझाव दिया है कि राज्य को ग्रे वाटर मैनेजमेंट और वाटर हॉर्वेस्टिंग के लिए अपने कन्वर्जेंस कोष का इस्तेमाल करना चाहिए.
झारखंड में पानी की कमी और दूषित पानी संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ता है. राज्य के कई जलस्रोत लौह, फ्लोराइड और आर्सेनिक से दूषित हैं. साथ ही वहां जीवाणु संदूषण (Bacterial contamination) भी है. समिति ने रासायनिक संदूषण के लिए बहुत कम जल स्रोतों और जीवाणु संदूषण के लिए 0.31 प्रतिशत जल स्रोतों के परीक्षण पर अपनी चिंता व्यक्त की है.
कोरोना महामारी के मौजूदा समय में पानी की कमी और जल प्रदूषण के मुद्दे से निबटना बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है. स्वच्छ जल बेहतर स्वच्छता को बढ़ावा देगा और घरेलू परिसर में एक चालू नल कनेक्शन होने से पानी के सार्वजनिक स्रोत पर भीड़ में कमी लाकर सुरक्षित दूरी को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा. इस प्रकार, राज्य को हर घर नल कनेक्शन के महत्व के बारे में अच्छी तरह से विचार करने की जरूरी है.
Posted By : Samir Ranjan.
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