नगर परिषद में सामानों की खरीदारी की जांच हो

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नगर परिषद में सामानों की खरीदारी की जांच हो

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ कार्यपालक पदाधिकारी का विवाद का मामला

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अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ कार्यपालक पदाधिकारी का विवाद का मामला दुर्जय पासवान, गुमला गुमला नगर परिषद में अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी के साथ कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार का विवाद अब गहराता जा रहा है. यह विवाद केवल व्यक्तिगत टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ गया है. वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल नगर परिषद द्वारा हाल के दिनों में की गई सामग्री खरीद पर गंभीर आरोप लगे हैं. लाइट, डस्टबिन, गाड़ियां, झाड़ू लगाने वाली मशीन और घास काटने वाली मशीन जैसी वस्तुओं को तीन से चार गुना कीमत पर खरीदे जाने की बात सामने आयी है. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कहना है कि चुनाव से पहले करोड़ों रुपये के टेंडर अपने चहेतों को बांटे गये. इस कारण नगर परिषद में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने वार्ड पार्षदों की एक जांच टीम बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो सभी योजनाओं और खरीद की स्थिति की जांच करेगी. पदाधिकारी के व्यवहार पर विवाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया. जब उन्हें रामनवमी पर्व और शहर की समस्याओं पर चर्चा के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने आने से इंकार कर दिया. बाद में जब वे पहुंचे तो उन्होंने कहा कि वे 29 दिन सरकार के लिए हैं और मात्र 1 दिन बोर्ड के लिए. अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने आदिवासी महिला होने के नाते उन्हें अपमानित किया और उपाध्यक्ष से भी असम्मानजनक भाषा में बात की. इतना ही नहीं, उन्होंने कार्यालय में कुर्सी को लात मारकर बाहर निकलने का भी आरोप लगाया गया. जनता और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया इस विवाद ने आम जनता को भी आक्रोशित कर दिया है. समाजसेवी मुख्तार आलम ने कहा कि पदाधिकारी आम जनता का फोन नहीं उठाते और मिलने से इंकार कर देते हैं. रोहित कुमार ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के पदाधिकारी घमंड में रहते हैं. सूरज वर्मा ने कहा कि नगर परिषद में अफसरशाही हावी है. जगदीश साहू ने आरोप लगाया कि मनीष कुमार के आने के बाद शहर का विकास ठप हो गया है. मो. तबरेज ने कहा कि नगर परिषद द्वारा खरीदी गयी सामग्री की जांच होनी चाहिए, क्योंकि दस हजार रुपये के सामान को कई गुना कीमत पर खरीदा गया है. प्रशासनिक कार्रवाई की मांग अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपा है. इसमें उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक अधिकारी का रवैया इस प्रकार का नहीं होना चाहिए. चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपमान करना जनता का अपमान है. उन्होंने मांग की है कि मनीष कुमार को गुमला से तत्काल हटाया जाये और उनके कार्यकाल की जांच कराई जाए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

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