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मात्र 75 हजार में शहीद तेलंगा खड़िया के परपोता ने एक एकड़ जमीन रखा बंधक, पेंशन के लिए दर्जनों बार किया आवेदन

Updated at : 05 Aug 2021 5:31 PM (IST)
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मात्र 75 हजार में शहीद तेलंगा खड़िया के परपोता ने एक एकड़ जमीन रखा बंधक, पेंशन के लिए दर्जनों बार किया आवेदन

वीर शहीद तेलंगा खड़िया के परपोता का परिवार अाज आर्थिक संकट से जूझ रहा है. पत्नी की इलाज के लिए परपोते ने मात्र 75 हजार रुपये में एक एकड़ जमीन बंधक रख दी, तो वृद्धावस्था पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों में कई बार चक्कर लगाये.

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Jharkhand News (दुर्जय पासवान, गुमला) : अंग्रेजों से लड़ने वाले वीर शहीद तेलंगा खड़िया के परपोता जोगिया खड़िया ने अपनी पत्नी पुनी खड़ियाइन के इलाज के लिए एक एकड़ जमीन बंधक रख दिया. मात्र 75 हजार रुपये में जमीन बंधक रखा. इसके बाद पुनी खड़ियाइन के पथरी का ऑपरेशन हुआ और अभी वह स्वस्थ है. पुनी से पहले जोगिया भी बीमार हो गया था. जोगिया के इलाज में भी 30 हजार रुपये खर्च हुआ है. जोगिया का इलाज उसका बेटा विकास खड़िया ने कराया. विकास खड़िया ने ओड़िशा राज्य के मछली कारखाना में मजदूरी कर 40 हजार रुपये कमाया था. उसी पैसे से जोगिया का इलाज हुआ.

शहीद का परिवार संकट में जी रहा है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस परिवार की मदद नहीं कर रहा. यहां तक कि शहीद के परपोता जोगिया खड़िया व पुनी खड़ियाइन वृद्ध हो गये हैं. वृद्धावस्था पेंशन के लिए एक दर्जन बार आवेदन जमा किया. सरकारी बाबुओं के दफ्तरों का चक्कर काटते रहे. लेकिन, अभी तक दोनों वृद्ध पति-पत्नी का वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत नहीं हुआ.

पढ़ाई के लिए मजदूरी कर रहा विकास

चौंकाने वाली बात है कि शहीद के परपोता जोगिया के पुत्र विकास खड़िया की पढ़ाई के लिए भी सरकार मदद नहीं कर रही है. विकास वर्तमान में मजदूरी कर पढ़ाई करने को विवश है. विकास ने गुमला शहर के एसएस बालक हाई स्कूल में इंटर कला संकाय में नामांकन कराया है. नामांकन कराने के लिए वह ओड़िशा राज्य में मजदूरी किया. पैसा कमाकर घर लौटा. इसके बाद वह उसी पैसा से अपने पिता का इलाज कराया और स्कूल में भी नामांकन कराया.

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इलाज के बाद जिंदा बचे पति-पत्नी, प्रशासन ने मदद नहीं की

शहीद के परपोता जोगिया खड़िया बीमार हो गये थे. स्थिति खराब थी. इलाज के लिए पैसे नहीं थे. तब जोगिया के पुत्र विकास खड़िया ओड़िशा से मजदूरी कर पैसा कमाकर घर लौटा. 30 हजार रुपये खर्च कर जोगिया का इलाज हुआ, तो उसकी जान बची. जोगिया ठीक हुए, तो उसकी पत्नी पुनी खड़ियाइन के पेट में पथरी हो गयी. सिसई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जांच कराया. 70 हजार रुपये हॉस्पिटल ने मांगा. परिवार के पास पैसे नहीं थे. अंत में जोगिया ने पत्नी पुनी के इलाज के लिए 75 हजार रुपये में एक एकड़ खेती योग्य जमीन को बंधक रख दिया है. इतना होने के बाद भी प्रशासन ने इस परिवार की कहीं मदद नहीं की.

शहीद के वंशजों ने कहा

गुमला से 18 किमी दूर घाघरा गांव में शहीद के वंशज अंग्रेजों के जमाने से रहते आ रहे हैं. जोगिया खड़िया व पुनी खड़ियाइन ने कहा कि हमें आज भी गर्व होता है कि हम शहीद तेलंगा खड़िया के वंशज हैं. लेकिन, सरकार व प्रशासन द्वारा शहीद के परिवार की उपेक्षा की जा रही है. घाघरा गांव में 16 परिवार है. जिसमें कुछ परिवार को शहीद आवास मिला है. लेकिन, अधिकांश घर अधूरा है. शौचालय भी पूरा नहीं हुआ है.

गांव तक आने के लिए एक किमी कच्ची सड़क है. बरसात में दिक्कत होती है. पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. एक किमी दूर कुआं से पानी लाकर पीते हैं. गांव में एक डीप बोरिंग होने से पानी का संकट नहीं होगा. जोगिया ने अपने बेटे विकास खड़िया को सरकारी नौकरी देने की मांग सरकार से की है.

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प्रतिमा क्षतिग्रस्त

घाघरा गांव जाने की सड़क पर असामाजिक तत्वों ने शहीद तेलंगा खड़िया की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया है. जिसकी मरम्मत नहीं की गयी है. वंशजों ने प्रशासन से प्रतिमा को ठीक करने व शिलापट्ट को भी सुंदर बनाने की मांग की है. जिस स्थान पर प्रतिमा है. उसकी घेराबंदी करने की मांग की है. जिससे प्रतिमा सुरक्षित रह सके.

Posted By : Samir Ranjan.

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