नशे पर वार करने के लिए युवाओं को खेल से जोड़ें : गौतम चौधरी

Updated at : 22 Feb 2025 9:49 PM (IST)
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नशे पर वार करने के लिए युवाओं को खेल से जोड़ें : गौतम चौधरी

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग व रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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गुमला. सिविल कोर्ट गुमला के तत्वावधान में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग व रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को कार्तिक उरांव कॉलेज के सभागार में किया गया. मुख्य अतिथि झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं प्रशासनिक न्यायाधीश गुमला जस्टिस गौतम कुमार चौधरी, विशिष्ट अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्र, उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, एसपी शंभू कुमार सिंह व मस्तिष्क विशेषज्ञ तथा काउंसलर डॉ सारिब अहमद ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किये. मुख्य अतिथि जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने कहा कि गुमला खेल की नगरी के लिए जाना जाता है. यहां के खिलाड़ी नेशनल स्तर तक पहुंच कर क्षेत्र व देश का नाम रोशन किये हैं. नशा पर वार करने के लिए युवाओं को खेल से जोड़ना बहुत जरूरी है. यहां जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता से युवाओं को जोड़ने पर उन्हें नयी दिशा व आत्मविश्वास मिलेगा. जो व्यक्ति सही और गलत का भेद नहीं कर सकता, वह अज्ञानता के अंधकार में जी रहा है. उन्होंने कहा कि नशा समाज के लिए सबसे घातक है, जो युवा पीढ़ी को अपनी चंगुल में फंसा कर उनके उज्ज्वल भविष्य को अंधकारमय बना देता है. कहा कि न्यायिक व्यवस्था केवल अपराधों को दंडित करने तक सीमित नहीं है. बल्कि समाज को जागरूक कर अपराधों को रोकना भी हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने पर बल दिया, जिससे उनकी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग हो सके. उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतिभाशाली छात्र व युवा जब गलत संगति में पड़ जाते हैं, तो उनका पूरा जीवन नष्ट हो सकता है. उन्होंने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि नशा से जुड़े अपराधों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है. उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं को नशे से दूर रखें और अपने परिवार व समाज को भी जागरूक करें. पीडीजे ध्रुव चंद्र मिश्र ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है. नशा व्यक्ति के मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन करता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता नष्ट हो जाती है और वह अपने कार्यों पर नियंत्रण नहीं रख पाता. डीसी कर्ण सत्यार्थी व एसपी शंभू कुमार सिंह ने कहा कि गुमला जिले में नशे के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है और प्रशासन नशामुक्त समाज बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. मस्तिष्क विशेषज्ञ व काउंसेलर डॉ सारिब अहमद ने नशे से होने वाले मानसिक, शारीरिक व सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी. कहा कि नशा व्यक्ति को पूरी तरह से मानसिक व शारीरिक रूप से अस्वस्थ बना देता है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता को समाप्त कर देता है. इस दौरान नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया, जिसमें नशे से होने वाली समस्याओं पर प्रभावी संदेश दिया गया. मौके पर एडीजे-वन प्रेम शंकर, एडीजे टू मनोज कुमार शर्मा, एडीजे तीन भूपेश कुमार, एडीजे चार संजीव कुमार भाटिया, एसीजेएम पार्थ सारथी घोष, डालसा सचिव रामकुमार लाल गुप्ता, सिविल जज सीनियर डिवीजन निर्मला बारला, एसडीजेएम पूनम कुमारी, न्यायिक दंडाधिकारी रीमा कुमारी, न्यायिक दंडाधिकारी श्वेता सोनी, न्यायिक दंडाधिकारी प्रतिक राज, न्यायिक दंडाधिकारी श्रद्धा भूषण, डीडीसी दिलेश्वर महतो, एसडीओ राजीव नीरज, शंभू सिंह समेत न्यायिक व जिला प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे.

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