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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण : 4 जोन में बंटेगा झारखंड, 8 तरह की संरचनाओं के बनेंगे इको फ्रैंडली आवास

Updated at : 10 Jul 2021 2:28 PM (IST)
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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण : 4 जोन में बंटेगा झारखंड, 8 तरह की संरचनाओं के बनेंगे इको फ्रैंडली आवास

Pradhan Mantri Awas Yojana Rural, रांची न्यूज (मनोज लाल) : भारत सरकार ने झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आठ तरह की संरचनाओं के आवास निर्माण की स्वीकृति दे दी है. झारखंड के सारे जिलों को चार जोन में बांटकर आठ प्रकार की संरचना वाले आवास बनाये जायेंगे. ये आवास जोखिमरोधी और आरामदायक होंगे. परंपरागत निर्माण सामग्री के उपयोग से बने होंगे. साथ ही पर्यावरण के अनुकूल भी होंगे.

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Pradhan Mantri Awas Yojana Rural, रांची न्यूज (मनोज लाल) : भारत सरकार ने झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आठ तरह की संरचनाओं के आवास निर्माण की स्वीकृति दे दी है. झारखंड के सारे जिलों को चार जोन में बांटकर आठ प्रकार की संरचना वाले आवास बनाये जायेंगे. ये आवास जोखिमरोधी और आरामदायक होंगे. परंपरागत निर्माण सामग्री के उपयोग से बने होंगे. साथ ही पर्यावरण के अनुकूल भी होंगे.

झारखंड के ग्रामीण विकास सचिव ने सभी डीसी और डीडीसी को इन संरचनाओं से अवगत कराया है. विभाग को बार-बार फील्ड के अफसरों से ये बातें सुनने को मिल रही थी कि आवासों के अपूर्ण रहने के कई कारण हैं. इसमें संरचना भी महत्वपूर्ण है.

जोन-1 : साहिबगंज गोड्डा, पाकुड़, देवघर और दुमका जोन-1 में रखा गया है. यहां सीमेंट मसाले से ईंट की नींव दी जायेगी. फिर मिट्टी या सीमेंट मसाले से जोड़ाई की जायेगी. दीवार की जोड़ाई पत्थर से और छत बंगाल टाली, देशी टाली (खपड़ा) या कोरोगेट शीट की होगी.

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जोन-2 : धनबाद, बोकारो, जामताड़ा, खूंटी, रामगढ़, रांची व सरायकेला शामिल हैं. यहां भी आवास निर्माण में सीमेंट मसाले से पत्थर की नींव रखी जायेगी. दीवार की जोड़ाई पत्थर व सीमेंट के मसाले से की जायेगी. छत बंगाल टाली, देशी टाली या कोरोगेट शीट की होगी.

जोन-3 : इसमें सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम हैं. यहां आवास की जोड़ाई पत्थर के बदले ईंट से की जायेगी. लेकिन नींव पत्थर की रखी जायेगी. इसमें सीमेंट का उपयोग होगा और इन जिलों में केवल बंगाल टाली का ही इस्तेमाल अनुमान्य होगा.

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जोन-4: इसमें गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, लोहरदगा और गुमला हैं. यहां सीमेंट मसाले और ईंट से ही नींव रखी जायेगी. यहां पत्थर का इस्तेमाल नहीं होगा. गढ़वा, पलामू, चतरा में ईंट का दीवार और बांस के जाली पर मिट्टी का दीवार दोनों में से कोई एक हो सकता है. छत पर बंगाल टाली का इस्तेमाल होगा. लातेहार, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, लोहरदगा व गुमला में कहीं-कहीं सीमेंट मसाले से जोड़ी गयी ईंट की दीवार अनुमान्य की गयी है.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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