2016 उड़ी हमले में शहीद हो गये थे चैनपुर के नायमन कुजूर, शहीद के घर शौचालय तक नहीं लेकिन गांव शौच मुक्त घोषित

Updated at : 19 Jul 2021 10:09 AM (IST)
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2016 उड़ी हमले में शहीद हो गये थे चैनपुर के नायमन कुजूर, शहीद के घर शौचालय तक नहीं लेकिन गांव शौच मुक्त घोषित

शहीद के पिता कई बार शौचालय के साथ पीएम आवास निर्माण की भी मांग कर चुके हैं. दो साल पहले ईंट तो गिरी, पर शौचालय नहीं बन पाया. शहीद का घर भी कच्ची मिट्टी और खपड़ा का है. बरसात में घर में रहने में दिक्कत होती है. प्रशासन से पीएम आवास बनवाने की भी मांग की गयी थी, लेकिन अभी तक घर नहीं बन पाया है.

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18 september 2016 uri attack गुमला : चैनपुर प्रखंड की बारडीह पंचायत स्थित उरू गांव में शहीद नायमन कुजूर का पैतृक घर है. उनके घर में शौचालय नहीं है. गांव के अन्य घरों का भी यही हाल है. लेकिन, प्रशासन ने जमीनी हकीकत से विपरीत दावा करते हुए शौचमुक्त गांव होने का बोर्ड लगा रखा है. ऐसे में प्रशासनिक दावे की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं. इधर, शहीद के वृद्ध पिता महानंद कुजूर व मां सुशांति कुजूर खेत में शौच के लिए जाने को विवश हैं. पांच साल पहले उरी हमले में 18 सितंबर 2016 को जम्मू कश्मीर में नायमन कुजूर शहीद हो गये थे. राज्य सरकार ने शहीद के परिजनों को हरसंभव मदद देने का वादा किया था, लेकिन अब तक पहल नहीं की गयी.

नहीं बन पाया पीएम आवास :

शहीद के पिता कई बार शौचालय के साथ पीएम आवास निर्माण की भी मांग कर चुके हैं. दो साल पहले ईंट तो गिरी, पर शौचालय नहीं बन पाया. शहीद का घर भी कच्ची मिट्टी और खपड़ा का है. बरसात में घर में रहने में दिक्कत होती है. प्रशासन से पीएम आवास बनवाने की भी मांग की गयी थी, लेकिन अभी तक घर नहीं बन पाया है.

ईंट गिरा कर भूल गया प्रशासन :

शहीद के पिता महानंद कुजूर व मां सुशांति कुजूर ने कहा कि हमने कई बार शौचालय बनवाने की मांग मुखिया संध्या देवी से की, पर उन्होंने इंकार कर दिया. अंत में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा शौचालय बनाने के लिए उनके घर में ईंट गिरायी गयी. ईंट गिराये हुए दो साल हो गये, लेकिन अब तक न तो शौचालय बनाने के लिए गड्ढा खोदा गया है और न ही दीवार खड़ी करने के लिए नींव ही खोदी गयी है.

मुखिया ने नहीं दी अतिरिक्त राशि की मंजूरी :

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 12 हजार रुपये की शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृति दी है, लेकिन 12 हजार में शौचालय नहीं बनेगा. इसलिए 15वें वित्त मद से और 12 हजार रुपये स्वीकृति के लिए मुखिया संध्या देवी को कहा गया. लेकिन दो साल से मुखिया इसे लटकाये हुए है. खुद मुखिया गुमला में रहती हैं, इसलिए शहीद के घर में शौचालय नहीं बन पाया है.

शौचालय बनाने के लिए दो साल पहले ईंट शहीद के घर के पास गिरायी गयी है. लेकिन मुखिया द्वारा 15वें वित्त मद से स्वीकृति नहीं दी गयी. जिस कारण शौचालय निर्माण लटक गया. इस मुद्दे पर वरीय अधिकारी से बात कर शहीद के घर में जल्द शौचालय बनाया जायेगा.

वीरेंद्र कुमार, प्रखंड समन्यवक, चैनपुर

शहीद के घर में शौचालय नहीं बनना चिंता की बात है. अभी तक किसी ने मुझे इसकी जानकारी नहीं दी थी. लेकिन अब प्रभात खबर के माध्यम से जानकारी मिली है. संबंधित विभाग व बीडीओ से बात कर जल्द शौचालय निर्माण व पीएम आवास की स्वीकृति देने की पहल करेंगे.

भूषण तिर्की, विधायक, गुमला

Posted By : Sameer Oraon

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