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नक्सल प्रभावित डुमरी प्रखंड में महिला हिंसा की शिकार पीड़ितों को न्याय दिलाने में जुटी ममता, जानें कैसे करती है काम

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : महिला हिंसा के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करतीं ममता मुक्ता ग्रेस लकड़ा.
Jharkhand news : महिला हिंसा के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करतीं ममता मुक्ता ग्रेस लकड़ा.
प्रभात खबर.

Jharkhand news, Gumla news : गुमला (दुर्जय पासवान) : गुमला जिले के डुमरी प्रखंड आदिवासी बहुल इलाका है. यह झारखंड राज्य के अंतिम छोर पर बसा है. डुमरी से छत्तीसगढ़ राज्य सटता है. इस क्षेत्र में महिला हिंसा की घटनाएं अक्सर घटते रहती है. इसलिए इस आदिवासी बहुल इलाके में महिला हिंसा के खिलाफ आदिवासी महिला ममता मुक्ता ग्रेस लकड़ा काम कर रही है. ममता महिलाओं को जागरूक करने के साथ साथ हिंसा की शिकार महिलाओं को न्याय भी दिलाने का अभियान चलाये हुए है. ममता इथान संस्था की सचिव है. ममता ने औरंगाबाद, गुजरात, शिमला, उतराखंड के ग्रामीण इलाके में महिला हिंसा के खिलाफ काम कर चुकी है. अब वह झारखंड राज्य को अपना कर्मक्षेत्र चुनी है. वह भी ऐसा इलाका (डुमरी प्रखंड) जो घोर नक्सल प्रभावित है और इस इलाके में अंधविश्वास एवं डायन बिसाही जैसी कुप्रथा है.

टूटते परिवारों को बचाया

ममता लगातार महिला हिंसा एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठायी है. टूटते परिवार को बचाया है. महिलाओं के बीच जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से महिला हिंसा, शिक्षा, नशापान, सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है. ममता मुक्ता पूर्व में कई राज्यों में काम कर चुकी हूं. लेकिन, झारखंड के अंतिम छोर में बसे डुमरी प्रखंड में काम करना चुनौती भरा है. ममता कहती हैं कि चुनौती के बीच काम करने में अच्छा लगता है. आये दिन महिला हिंसा की कोई न कोई मामला आता है. दहेज उत्पीड़न, आपसी घरेलू झगड़ा, मारपीट, डायन बिसाही सहित कई तरह की महिला हिंसा को काउंसिलिंग के तहत मामला सुलझायी है. डुमरी के कुटलू गांव में महिला उत्पीड़न मामले को लेकर पीड़िता को काउंसिलिंग के माध्यम से मानसिक परेशानी से बचाने का काम की है.

गांव- घर की दुर्दशा खींच लायी : ममता

ममता का जन्मस्थली गढ़वा जिला का भंडरिया है, जबकि उसका ससुराल डुमरी प्रखंड के हिसरी गांव है. वह जब दूसरे राज्यों में काम कर रही थी. तभी उसके मन में आया कि क्यों न अपने ही गांव- घर में रहकर महिला हिंसा के खिलाफ काम करूं. इसी सोच के साथ ममता ने वर्ष 2018 को डुमरी प्रखंड में इथान संस्था बनायी. इसमें महिलाओं को जोड़ी. इसके बाद महिला हिंसा के खिलाफ काम करने के अलावा अंधविश्वास, डायन बिसाही, पुरानी कुप्रथा सहित ग्रामीण परिवेश में आने वाली कई समस्याओं को दूर करने के लिए काम कर रही है. ममता कहती हैं कि डुमरी उसका जाना पहचाना इलाका है. इसलिए वह यहां काम रही है. महिला हिंसा के कई केसों का उन्होंने निपटारा किया है. यहां तक कि महिला शक्ति के बारे में भी महिलाओं को जागरूक कर रही है.

महिला थाना में हर दिन 3- 5 केस आते हैं

महिला उत्पीड़न से संबंधित मामले गुमला जिले में हर रोज आती है. महिला थाना में तो हर दिन 3 से 5 मामले आते हैं. जिसका निपटारा महिला थाना के परामर्शदातृ महिलाओं द्वारा समझौता के साथ कराया जाता है. जिस मामले का निपटारा नहीं हो पाता है. उस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाती है. वहीं, डायन बिसाही में हर सप्ताह 2- 3 मामले आते हैं.

उग्रवाद क्षेत्र होने के कारण ज्यादा हिंसा

गुमला जिला नक्सल ए श्रेणी में आता है. जिले में 12 प्रखंड है. यहां 952 गांव है. 80 प्रतिशत गांव दूरस्थ क्षेत्र है. अधिकांश गांवों में उग्रवाद का भय है. जिस कारण पुलिस भी कई गांवों में संभल कर जाती है. उग्रवाद क्षेत्र होने के कारण ग्रामीण इलाकों में महिला हिंसा की घटनाएं लगातार होते रहती है. खासकर वृद्ध महिलाओं को डायन बिसाही कहकर ज्यादा प्रताड़ित किया जाता है. गुमला जिले में महिला हिंसा की घटनाओं में दुष्कर्म एवं डायन बिसाही के मामले ज्यादा है.

गुमला में दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी

गुमला जिले में ही साल दुष्कर्म की घटना बढ़ रही है. वर्ष 2003 से सितंबर 2020 तक जिले में 417 दुष्कर्म की घटनाएं घटित हो चुकी है.
वर्ष : संख्या
2003 : 31
2004 : 40
2005 : 45
2006 : 55
2007 : 60
2008 : 38
2009 : 38
2010 : 48
2011 : 46
2012 : 36
2013 : 59
2014 : 67
2015 : 56
2016 : 55
2017 : 75
2018 : 78
2019 : 85
2020 में सितंबर माह तक : 63

Posted By : Samir Ranjan.

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