गुमला का यह पिता 25 साल से बेटों के आने का इंतजार, कहा : याद कर रो पड़ता हूं, मानव तस्करों ने कर दिया था अलग
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Jun 2021 12:59 PM
मामला रायडीह प्रखंड के पीबो पंचायत स्थित बिरहोर टोंगरी व गोसाईकोना गांव की है. बिरहोर कॉलोनी निवासी जोहन बिरहोर के पुत्र अकूब बिरहोर 25 साल से गायब है. पिता ने कहा कि मैं कई बार बेटे को याद कर रो पड़ता हूं. न जाने वह कहां होगा. किस हाल में होगा. यह सोचता रहता हूं. जोहन ने बताया कि जब अकूब 10 वर्ष का था. तभी दूसरे गांव की कष्टी देवी व उसका पति विधि द्वारा अकूब को काम करने के बहाने घर से ले गये.
गुमला : मानव तस्करों ने मां व पिता से उनके बेटों का प्यार छीन लिया. परिवार के लोग 25 सालों से अपने बेटों के आने का इंतजार कर रहे हैं. परंतु, कब आयेंगे? यह सवाल परिवार के सदस्य अक्सर आपस में करते रहते हैं. हर दिन भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके खोये हुए बेटे वापस घर आ जाये.
मामला रायडीह प्रखंड के पीबो पंचायत स्थित बिरहोर टोंगरी व गोसाईकोना गांव की है. बिरहोर कॉलोनी निवासी जोहन बिरहोर के पुत्र अकूब बिरहोर 25 साल से गायब है. पिता ने कहा कि मैं कई बार बेटे को याद कर रो पड़ता हूं. न जाने वह कहां होगा. किस हाल में होगा. यह सोचता रहता हूं. जोहन ने बताया कि जब अकूब 10 वर्ष का था. तभी दूसरे गांव की कष्टी देवी व उसका पति विधि द्वारा अकूब को काम करने के बहाने घर से ले गये.
इसके बाद से अकूब घर नहीं लौटा. कई बार कष्टी व विधि से अपने बेटे के बारे में पूछा. परंतु वे लोग दबंग हैं. इसलिए कुछ नहीं बताये. हम गरीब बिरहोर जनजाति के लोग हैं. इसलिए हम डर से चुप हो गये और बेटे की याद में घुट-घुट कर जी रहे हैं.
जोहन ने कहा कि अब मेरा बेटा 35 साल का हो गया है. एक बार उसे देखने की इच्छा है. परंतु मैं कब मर जाऊंगा, कहा नहीं जा सकता. मरने से पहले एक बार बेटे को देख लूं तो मन को सुकून मिलेगा. गांव के लोग भी अकूब को याद करते हैं. गांव का वह एकलौता जवान बेटा है, जो लापता है. अकुब नागालैंड गया था. वहीं कहीं खो गया.
गोसाईकोना गांव के गोवर्धन प्रधान 10 साल की उम्र में अपने घर से निकला था. कुछ लोग उसे ठग कर ले गये थे. उसके साथ अन्य कुछ साथी भी नागालैंड गये थे. परंतु गोवर्धन के साथी किसी प्रकार भागकर गांव लौट आये. पर अभी तक गोवर्धन नहीं लौटा है. वह घर का बड़ा बेटा है. अब उसकी उम्र 35 साल हो गयी है. उसका छोटा भाई धनी प्रधान जो अभी गांव में रहता है. उन्होंने बताया कि मेरा भाई जब 10 वर्ष का था. तभी गांव से निकला. इसके बाद से नहीं लौटा. मैं अपने बड़े भाई के आने का इंतजार हर रोज करता हूं. धनी ने कहा कि जब मैं पांच साल का था. उस समय मेरा बड़ा भाई 10 साल का था.
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