लोहरदगा में IED ब्लास्ट : पति के अंतिम दर्शन के लिए 90 किमी तक रोती रही शहीद दुलेश्वर की पत्नी

Updated at : 16 Feb 2021 8:25 PM (IST)
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लोहरदगा में IED ब्लास्ट : पति के अंतिम दर्शन के लिए 90 किमी तक रोती रही शहीद दुलेश्वर की पत्नी

Jharkhand News, Ranchi News, Gumla News : लोहरदगा में शहीद हुए जवान दुलेश्वर प्रसाद (28 वर्षीय) के पैतृक गांव कटिंबा (जारी प्रखंड) में गम का माहौल है. दुलेश्वर मंगलवार को लोहरदगा के सेरेंगदाग में नक्सलियों द्वारा बिछाये गये IED बम ब्लास्ट में शहीद हो गये. दोपहर में प्रभात खबर की टीम शहीद जवान दुलेश्वर के गांव पहुंची. गांव में मातमी सन्नाटा था. हर घर में ताला लटका हुआ था. गांव के लोग शहीद के घर के पास जुटे हुए थे.

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Jharkhand News, Ranchi News, Gumla News, रांची/ गुमला (दुर्जय पासवान/जयकरण) : लोहरदगा जिले के सेरेंगदाग में नक्सलियों द्वारा बिछाये गये IED बम के जद में आ गये सैप के जवान दुलेश्वर प्रसाद. गंभीर रूप से घायल जवान को इलाज के लिए रांची लाया गया, जहां उनका निधन हो गया. शहीद जवान दुलेश्वर के जारी प्रखंड स्थित कटिंबा गांव में गम का माहौल है. वहीं, राजधानी रांची में सीएम हेमंत सोरेन शहीद हुए वीर जवान को शत-शत नमन किया. साथ ही उन्होंने कहा कि परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर परिवार को दुःख की घड़ी सहन करने की शक्ति दें.

इधर, लोहरदगा में शहीद हुए जवान दुलेश्वर प्रसाद (28 वर्षीय) के पैतृक गांव कटिंबा (जारी प्रखंड) में गम का माहौल है. दुलेश्वर मंगलवार को लोहरदगा के सेरेंगदाग में नक्सलियों द्वारा बिछाये गये IED बम ब्लास्ट में शहीद हो गये. दोपहर में प्रभात खबर की टीम शहीद जवान दुलेश्वर के गांव पहुंची. गांव में मातमी सन्नाटा था. हर घर में ताला लटका हुआ था. गांव के लोग शहीद के घर के पास जुटे हुए थे.

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परिवार को दुलेश्वर के शहीद होने की जानकारी पुलिस द्वारा दी गयी थी. जारी थाना की पुलिस ने शहीद के परिवार को रांची के लिए रवाना किये. घर में शहीद की भाभी चिंतामणि देवी थी, जो अपने देवर की शहादत की सूचना पर रो रही थी. गांव के अन्य लोगों का भी रो- रोकर बुरा हाल था. वहीं, शहीद के दोस्त रविंद्र सिंह व जगरनाथ साय पास में मौजूद थे. दोनों दोस्तों के आंखें नम थी.

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शहीद की पत्नी रेखा देवी अपने 3 बच्चों के साथ गुमला शहर के लक्ष्मण नगर में किराये के घर में रहती है. पति के शहीद होने की सूचना पर रेखा देवी अपने रिश्तेदारों के साथ रांची के लिए रवाना हो गयी. गुमला से रांची जाने के क्रम में 90 किमी तक वह रोते रही. परिजन उसे ढाढस बंधाते रहे. लेकिन, वह रूक- रूककर रोते रही. बार-बार वह अपने पति से मिलने की बात कर रही थी. रांची पहुंचने पर शव देखकर पत्नी का बुरा हाल हो गया.

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शहीद का नया घर बनाने का था सपना

शहीद जवान दुलेश्वर प्रसाद किराये के मकान में गुमला शहर के लक्ष्मण नगर में रहता था. लक्ष्मण नगर में 8 डिसमिल जमीन लिया था. जहां वह अपना पक्का घर बनाने का सपना देखा था. दिलेश्वर ने अपनी पत्नी से कहा था कि लोन लेकर घर बनायेंगे और पूरा परिवार एक साथ रहेंगे. यह बातें शहीद जवान दुलेश्वर की पत्नी रेखा देवी ने प्रभात खबर से बात करते हुए बतायी. पति के शहादत की सूचना पर परिवार के सदस्य एवं बच्चों को लेकर रेखा रांची गयी है. जब से उसे अपने पति के शहीद होने की सूचना मिली है. उसका रो- रोकर बुरा हाल है. प्रभात खबर से बात करने के दौरान भी रेखा देवी रो रही थी.

उन्होंने कहा कि डेढ़ माह पहले दुलेश्वर घर आया था. इसके बाद वह ड्यूटी पर चला गया. ड्यूटी में जाते समय कहा था कि होली पर्व में छुट्टी लेकर आऊंगा, लेकिन आज उसके शहादत की जानकारी मिली. दो बेटा व एक बेटी है. बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए गुमला के लक्ष्मण नगर में किराये के घर में रह रहे हैं. लक्ष्मण नगर में ही 8 डिसमिल जमीन खरीदे हैं. जहां पक्का घर बनाने का सपना मेरे पति ने देखा था, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया.

हौसले का बुलंद था मेरा दोस्त : रवींद्र

शहीद के दोस्त रवींद्र सिंह ने कहा कि मेरा दोस्त हौसला का बुलंद था और कभी ना हार मानने वाला इंसान था. साथ में पुलिस बहाली के लिए खूंटी में दौड़ लगाये थे, लेकिन दुलेश्वर पास हो गया और पुलिस बन गया. हम फेल हो गये. जिसके बाद हम गांव में खेती- बारी कर रहे हैं. वह देश की सेवा करते शहीद हो गया. उन्होंने बताया कि जब भी दुलेश्वर गांव आता था. हमलोग साथ में घूमते थे.

दिसंबर में अंतिम बार गांव आया था : भाभी

शहीद दुलेश्वर की भाभी चिंतामणि देवी ने बताया कि मेरे देवर शुरू से ही पुलिस की नौकरी करना चाहते थे. जिसके लिए कड़ी मेहनत की. दुलेश्वर की पढ़ाई संत मारिया हाई स्कूल, बारडीह से हुई. एसएस हाई स्कूल, गुमला से मैट्रिक पास किया. दुलेश्वर की बहाली वर्ष 2012 में हुई थी. देवर दुलेश्वर दिसंबर, 2020 में गांव आये थे. शादी समारोह में भाग लिये. उन्होंने कहा था कि जल्द ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा, लेकिन हम लोगों को क्या पता था कि उसके शहीद होने की सूचना मिलेगी. दुलेश्वर दो भाई व दो बहन में से सबसे छोटा था. दुलेश्वर प्रसाद की मां का एक साल पहले निधन हो गया है. पिता व भाई गांव में खेती-बारी करते हैं.

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गांव के जगरनाथ साय जो कि शहीद के दोस्त हैं. उन्होंने बताया कि कटिंबा गांव से 4 युवक सेना में हैं और अपने देश की रक्षा में लगे हुए हैं. उनमें से एक दुलेश्वर प्रसाद भी था, जो हर समय गांव वालों के लिए मदद के लिए खड़ा रहता था. जब भी घर आता था. गांव के लोगों से जरूर मिलता था. छुट्टी खत्म होने पर जब ड्यूटी के लिए निकलता था, तो कई साथी उसे छोड़ने के लिए रास्ते तक जाते थे. सहज विश्वास नहीं हो रहा कि दुलेश्वर शहीद हो गया. वहीं, गांव में कई लोग दुलेश्वर की फेसबुक पर से उनका फोटो निकाल कर निहारते दिख रहे थे. लोगों का कहना है कि दुलेश्वर का अंतिम संस्कार गांव में ही होगा.

Posted By : Samir Ranjan.

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