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मजदूरी करने गये गुमला के युवक की गोवा में मौत, विमान से शव पहुंचा रांची

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कमाने गया गुमला के टुयलू की गोवा में हुई मौत. शव आया रांची. घर के बाहर खड़े परिजन.
कमाने गया गुमला के टुयलू की गोवा में हुई मौत. शव आया रांची. घर के बाहर खड़े परिजन.
प्रभात खबर.

Jharkhand News (दुर्जय पासवान, गुमला) : गुमला जिला अंतर्गत पालकोट प्रखंड के उमड़ा पंचायत स्थित टेकराटोली गांव के टुयलू खड़िया (27 वर्ष) की मौत गोवा में हो गयी. वह गरीबी के कारण रोजी-रोटी के लिए पैसा कमाने गोवा गया था. बुधवार को अचानक उसकी तबीयत खराब हुई. उसे गोवा के मेडिकल कॉलेज में भरती कराया गया था. जहां मुंह से खून निकला और उसकी मौत हो गयी. जिस होटल में टुयलू काम करता था. उस होटल के मालिक, गुमला के श्रम अधीक्षक एतवारी महतो व विधायक विक्सल कोंगाड़ी की पहल से टुयलू के शव को गुरुवार की रात को सात बजे विमान से रांची लाया गया. इसके बाद प्रशासन ने शव को मृतक के घर पहुंचवाया. टुयलू की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

मां ने उधारी लेकर बेटे को गोवा भेजी थी

टुयलू 5 वर्षों से गोवा के एक होटल में वेटर का काम करता था. टुयलू की मौत के बाद इसकी जानकारी गोवा से गांव के संदीप टेटे ने परिजनों को दिया. परिजन जब शव को लाने में असमर्थ हुए, तो इसकी जानकारी सिमडेगा विधानसभा के विधायक भूषण बाड़ा को कोलेंग पंचायत की मुखिया सुषमा केरकेट्टा ने दी.

इसके बाद मृतक का शव को विमान से रांची लाया गया. टुयलू की मौत की खबर मिलने के बाद पालकोट के प्रतिनिधि महीपाल सिंह गुरुवार को टेकराटोली गांव पहुंचा. जहां मृतक टुयलू के परिवार वालों से जानकारी लिया, तो मृतक की मां ढेली खड़ियाइन ने बताया कि मेरा बेटा पांच सालों से गोवा में रहकर होटल में मजदूरी कर रहा था.

जब कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन लगा था. तब टुयलू गांव आया था. गांव में छह महीना रहने के बाद पुनः गोवा चला गया था. मृतक की मां ने बताया कि बेटा को गोवा जाने के लिए रुपये नहीं था. तब मैंने गांव के महिला मंडल से 10 हजार रुपये ऋण लेकर गोवा भेजा था. मृतक टुयलू की शादी चार साल पहले पालकोट के गोनमेर गांव में हुआ था. टुयलू की पत्नी सुशांति खड़ियाइन रांची में दाई का काम करती है.

गांव में कोई काम-धंधा नहीं है

मृतक की मां ढोली खड़ियाइन ने बताया कि हमलोगों का गांव में जमीन बहुत कम है. किसी तरह परिवार का गुजरा होता है. इसलिए मेरा बेटा गोवा कमाने गया था. जहां उसकी मृत्यु हो गयी. मां ने बताया कि टुयलू दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा था. राशन कार्ड है. शौचालय भी बना है. पीएम आवास नहीं मिला है. यहां बताते चलें कि टेकराटोली गांव में आदिवासी खड़िया समाज के साथ साहू लोगों का गांव है. जिसकी आबादी 500 है. जिसमें आधा से अधिक खड़िया समाज के लोग हैं. गांव का मुख्य पेशा खेती-बारी है. जिससे लोगों को बहुत मुश्किल से काम चलता है.

8 युवकों ने किया है पलायन

गांव में रोजगार का साधन नहीं होने से इस गांव के 8 युवक राज्य से बाहर पलायन कर गये हैं. जिसमें गोवा में पांच, आंध्रप्रदेश में एक, पंजाब में एक, दिल्ली एक युवक पलायन किया है. ग्रामीणों ने बताया कि मुखिया भगवती देवी गांव का हाल समाचार लेने नहीं आती है. इसके अलावा गांव का डीलर द्वारा जुलाई माह का मुफ्त राशन भी नहीं दिया है.

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