गुमला में श्मशान घाट की सफाई के नाम पर मांगा जा रहा पैसा, स्थानीय लोगों ने किया विरोध

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गुमला के श्मशान घाट में सफाई के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है. स्थानीय लोगों और पार्षदों ने नगर परिषद से इस भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

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गुमला: गुमला जिले में श्मशान घाट की साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. श्मशान घाट की नियमित सफाई के नाम पर कथित रूप से 1,000 रुपये प्रतिमाह की मांग किए जाने का आरोप लगाते हुए सामाजिक संस्था और वार्ड पार्षद ने इसका विरोध किया है. मामले में नगर परिषद से तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदारी तय करने और पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई है.

लायंस क्लब गुमला फैमिली के प्रेसिडेंट ने उठाया सवाल

लायंस क्लब गुमला फैमिली के प्रेसिडेंट लायन शिशिर गुप्ता ने श्मशान घाट की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील और सार्वजनिक स्थल है. श्मशान घाट की नियमित सफाई के लिए नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं से अलग से मासिक राशि की मांग किया जाना निंदनीय और जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि श्मशान घाट कोई निजी या व्यावसायिक स्थल नहीं है. इसकी साफ-सफाई, रखरखाव और आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी निकाय या अधिकृत एजेंसी की होनी चाहिए.

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यह मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है

उन्होंने कहा कि किसी परिवार में निधन होने पर परिजन पहले ही मानसिक और भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुजरते हैं. ऐसे समय में यदि उन्हें श्मशान घाट की गंदगी, अव्यवस्था और सफाई के लिए अतिरिक्त राशि की मांग जैसी स्थिति का सामना करना पड़े तो यह मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है. शिशिर गुप्ता ने नगर परिषद से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि श्मशान घाट की नियमित सफाई की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी को दी गई है. यदि किसी एजेंसी को सफाई कार्य के लिए पहले से भुगतान किया जा रहा है तो उसे किस मद में भुगतान किया जा रहा है और उसके निर्धारित कार्यों में श्मशान घाट की सफाई शामिल है या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए.

सफाई के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

वार्ड नंबर 22 के पार्षद मनीष कुमार ने भी श्मशान घाट की सफाई के नाम पर राशि मांगने का विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार स्थल जैसे पवित्र स्थान पर भी सफाई के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है. पार्षद ने दावा किया कि जिस सफाई एजेंसी को बोर्ड द्वारा निरस्त किया जा चुका है, उसे कुछ अधिकारियों द्वारा अब भी काम से जोड़े रखने पर सवाल उठ रहे हैं.

गुमला उपायुक्त से जांच कराने और दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई की मांग

मनीष कुमार ने कहा कि जब नगर परिषद की ओर से सफाई एजेंसी को कचरा उठाने के लिए भुगतान किया जाता है, तो श्मशान घाट की सफाई के लिए अलग से 1,000 रुपये मासिक मांगने का औचित्य स्पष्ट होना चाहिए. उन्होंने गुमला उपायुक्त से मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है.

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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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