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गुमला के झरगांव जंगल में लगी आग, हजारों पौधे जलकर हुए बर्बाद, 5 घंटे बाद पाया गया काबू

By Prabhat khabar Digital
Updated Date

सेटेलाइट अलर्ट से जंगल में आग लगने की सूचना मिलने के बाद आग बुझाने में 5 घंटे लगे.
सेटेलाइट अलर्ट से जंगल में आग लगने की सूचना मिलने के बाद आग बुझाने में 5 घंटे लगे.
प्रभात खबर.

Jharkhand News (जगरनाथ पासवान, गुमला) : जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है वैसे-वैसे जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही है. आये दिन गुमला जिला अंतर्गत पड़ने वाले जंगलों में आग लग रही है. जंगलों में आग लगने की घटना मार्च माह में शुरू हुई है. जो अब तक जारी है. मार्च माह से लेकर अब तक सैकड़ों बार जंगलों में आग लग चुकी है. इधर, गत दिन भी कुरूमगढ़ वन प्रक्षेत्र अंतर्गत चैनपुर प्रखंड के झरगांव में आग लग गयी. आग लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र तक फैल चुकी थी. उक्त आग को बुझाने के लिए वन विभाग को लगभग 5 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी.

जंगल में आग लगने की सूचना जैसे ही वन विभाग को मिली. वैसे ही वन विभाग के वनरक्षी मुनेश्वर राम व संतोष गोप स्थानीय वन समिति के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास करने लगे. लगभग 5 घंटे तक मशक्कत करने के बाद आग को तो बुझा लिया गया, लेकिन आग बुझने से पहले हजारों की संख्या में नवजन्में एवं छोटे-बड़े पौधे जलकर बर्बाद हो गये.

वहीं, 3 हेक्टेयर क्षेत्र के मिट्टी की उर्वरता भी खत्म हो गयी, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि प्रत्येक वर्ष गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हो जाती है. आये दिन किसी न किसी जंगल में आग लगती रहती है. कई बार ऐसा भी होता है कि एक ही दिन में दो-तीन जगहों पर आग लग जाती है. इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इसका उचित प्रबंधन नहीं किया जा रहा है.

आग लगने की संभावित जगहों को चिह्नित कर वहां आद्रता (नमी) बनाये रखने की जरूरत है. वन प्रमंडल, गुमला के वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रीकांत ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटना आम हो जाती है. जंगल में कहीं भी आग लगने के बाद आग लगने की सूचना सैटेलाइट अलर्ट से प्राप्त होती है. सूचना प्राप्त होते ही आग बुझाने का कार्य शुरू कर देते हैं.

उन्होंने बताया कि इस वर्ष जंगलों में लगी आग ने वन कर्मियों की परीक्षा ली है. आग बुझाने के लिए खासा मशक्कत करनी पड़ी है. जंगल में आग लगने की घटनाएं मार्च माह से अब तक अनवरत चलती रही है. इसमें कोई कमी नहीं आयी है. लगभग 5 वर्ष पहले तक पहाड़ पर दिवाली जैसे आग का मंजर होता था जो अब काफी हद तक रोकथाम कर लिया गया है. जंगलों में लगी आग के प्रबंधन का कार्य सकारात्मक परिणाम दे रहा है. लेकिन, इसमें और सुधार की गुंजाइश है, ताकि जंगल के भीतर जहां आग लगती है. वहां आद्रता बनायी जा सके.

Posted By : Samir Ranjan.

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