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माता-पिता की मौत के बाद तीनों नाबालिग बच्चे हुए अनाथ, कोरोना ने छीना आश्रह गृह, मदद नहीं मिली तो गुमला के ये बच्चे हो सकते हैं मानव तस्करी के शिकार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अपने जर्जर घर के बाहर गुमला के तीनों अनाथ बच्चे
अपने जर्जर घर के बाहर गुमला के तीनों अनाथ बच्चे
प्रभात खबर

Jharkhand News, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : साहब, तीन बच्चे संकट में हैं. तीनों सगे भाई हैं. माता पिता की मौत हो चुकी है. अब ये तीनों भाई अनाथ हैं. इन बच्चों को मदद नहीं मिली तो मानव तस्करी का शिकार होने का डर है. हम बात कर रहे हैं बिशुनपुर प्रखंड के हेलता गांव के तीन अनाथ बच्चों की. सचिन उरांव (16 वर्ष), सिलास उरांव (12 वर्ष) व रामविलास उरांव (10 वर्ष) है. इनके पिता बंधन उरांव का पांच साल पहले व मां पिंकी देवी की दो साल पहले निधन हो गया है. दोनों की मौत बीमारी से हुई है.

मां पिता की मौत के बाद ये तीनों बच्चे अनाथ हो गये. इनकी परवरिश के लिए कोई नहीं है. कुछ माह तक तीनों बच्चों को गुमला के एक आश्रय गृह में रखा गया था. परंतु कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद आठ माह पहले तीनों बच्चों को उनके घर भेज दिया. तब से ये तीनों बच्चे टूटे फूटे कच्ची मिटटी के घर में रह रहे हैं. घर भी जर्जर अवस्था में है. घर के ध्वस्त होने का डर है. परंतु कोई सहारा व आश्रय देने वाला नहीं है. इस कारण ये बच्चे इसी घर में रह रहे हैं.

बंधन उरांव व पिंकी देवी मजदूरी करते थे. हर दिन कमाते थे तो खाते थे. परंतु पांच साल पहले बंधन बीमार हो गया. इलाज में घर का सारा पैसा खर्च हो गया. इसके बाद भी बंधन स्वस्थ नहीं हुए और उनकी मौत हो गयी. पति की मौत के बाद पत्नी पिंकी देवी हताश हो गयी. किसी प्रकार तीन बेटों की परवरिश कर रही थी. परंतु मजदूरी करते हुए वह भी बीमार हो गयी और उसकी भी मौत हो गयी. बच्चों के अनुसार गरीबी व बीमारी ने उनके माता पिता को उनसे छिन लिया.

बच्चों ने बताया कि उनके पिता के नाम से राशन कार्ड बना हुआ है. चावल मिलता है. परंतु दाल, तेल, सब्जी खरीदने व अन्य दैनिक उपयोग के लिए पैसा नहीं है. जिससे उन्हें परेशानी हो रही है. बच्चों ने यह भी बताया कि जब प्रशासन को अनाथ होने की जानकारी मिली थी तो कुछ महीनों के लिए गुमला के आश्रय गृह में रखा गया. परंतु बाद में उन्हें वापस घर भेज दिया गया. गुमला से अपने घर वापस लौटे आठ माह हो गया. आठ माह से किसी प्रकार अपने घर में रहकर जी खा रहे हैं.

बच्चों ने बताया कि माता पिता की मौत का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए प्रखंड कार्यालय में आवेदन दिया है. परंतु अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बना है. जिस कारण पारिवारिक लाभ योजना का लाभ नहीं मिल पा रही है. समाज सेवी प्रेमचंद उरांव ने कहा कि समाज कल्याण विभाग से कहा गया था कि इन बच्चों की परवरिश के लिए फोस्टर केयर का लाभ मिलेगा. परंतु बाल संरक्षण विभाग द्वारा किसी प्रकार की मदद नहीं की जा रही है.

14 मई 2021 की घटना : घाघरा ब्लॉक के चुंदरी नवाटोली गांव की 45 वर्षीय करमी देवी की मौत हो गयी थी. अचानक बीमार हुई और उसकी जान चली गयी थी. लक्षण कोरोना ही था. पति की मौत चार माह पहले बीमारी से घर पर हुई थी. चार बच्चे अनाथ हुए हैं. जिसमें 16 वर्षीय गुड़िया कुमारी, 14 वर्षीय प्रेम उरांव, 8 वर्षीय बहादुर उरांव व 6 वर्षीय फूलकुमारी कुमारी है.

22 मई 2021 की घटना : घाघरा ब्लॉक के टोटांबी ग्राम निवासी 45 वर्षीय कशीला देवी की मौत हुई थी. वह बीमार थी. लक्षण कोरोना का ही था. परंतु प्रशासन कोरोना से मौत नहीं मान रहा है. जबकि पति पलायन कर गया है. पांच बच्चे अनाथ हुए. जिनमें 12 वर्षीय विमला कुमारी, 9 वर्षीय मोती महली, 7 वर्षीय इंदर महली, 6 वर्षीय रानी कुमारी व 4 वर्षीय छोटी कुमारी है.

17 अप्रैल 2021 की घटना : बसिया के लवाकेरा मुंडाटोली गांव के सुगर टोपनो की मौत 17 अप्रैल को दिल्ली अस्पताल में कोरोना से हो गयी थी. शव को बसिया लाकर कोरोना गाइड लाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया था. इसके बाद पत्नी सोशांति टोपनो की 29 अप्रैल को ऑक्सीजन लेबल कम होने से गुमला में इलाज के क्रम में मौत हुई थी. जिससे दो बच्चे 18 वर्षीय नेहा टोपनो व 12 वर्षीय स्नेहा टोपनो अनाथ हो गये.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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