237 लाख दबाये बैठे हैं इंजीनियर

Published at :27 Mar 2016 12:30 AM (IST)
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237 लाख दबाये बैठे हैं इंजीनियर

लापरवाही. कैसे होगा विकास, जब काम करनेवाले ही करेंगे गड़बड़ी! गुमला जिले में एनआरइपी विभाग के 50 से अधिक इंजीनियर विकास व रोजगार योजनाओं का पैसा दबाये बैठे हैं. इंजीनियरों के पास लाखों रुपये हैं, लेकिन उन्होंने न तो विकास का काम किया है, न ही सरकार को पैसा वापस कर रहे हैं. दुर्जय पासवान […]

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लापरवाही. कैसे होगा विकास, जब काम करनेवाले ही करेंगे गड़बड़ी!
गुमला जिले में एनआरइपी विभाग के 50 से अधिक इंजीनियर विकास व रोजगार योजनाओं का पैसा दबाये बैठे हैं. इंजीनियरों के पास लाखों रुपये हैं, लेकिन उन्होंने न तो विकास का काम किया है, न ही सरकार को पैसा वापस कर रहे हैं.
दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला जिले में एनआरइपी विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) के इंजीनियर 237 लाख 12 हजार रुपये दबाये बैठे हैं. 50 से अधिक इंजीनियर हैं, जिनके पास इतनी मोटी रकम बकाया है. किसी के पास दो लाख, तो किसी इंजीनियर के पास पांच से 15 लाख रुपये बकाया है.
इंजीनियरों ने सड़क, पुल, पुलिया व भवन बनाने के नाम पर अग्रिम राशि ली थी, लेकिन इंजीनियरों ने काम किया नहीं और राशि हड़प ली. विभाग द्वारा कई बार इंजीनियरों से अग्रिम राशि भुगतान करने के लिए कहा गया, लेकिन इंजीनियर सरकारी राशि को वापस नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि गुमला जिले में विकास व रोजगार योजनाओं का हाल खराब है.
काम हुआ नहीं, कागज में फाइनल है : गुमला के शंभु सिंह ने राज्य के मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव एनएन सिन्हा, डीसी श्रवण साय, डीडीसी एनके सिन्हा व एनआरइपी के कार्यपालक अभियंता को ज्ञापन प्रेषित किया है. ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि एनआरइपी गुमला के अभियंताओं को अग्रिम राशि दी गयी थी, लेकिन अग्रिम की बकाया राशि का समायोजन लंबे समय से लंबित है.
वर्ष 2007-2008 से लेकर वित्तीय वर्ष 2015-2016 तक की अवधि में अभियंताओं पर लंबित अग्रिम की कुल राशि दो करोड़ 37 लाख 12 हजार रुपये है. इसका खुलासा आरटीआइ से हो चुका है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, लंबित अग्रिम राशि से संबंधित सभी योजनाएं अधूरी हैं. कई योजनाओं पर काम भी शुरू नहीं हुआ है, जबकि प्रोग्रेस रिपोर्ट व अन्य कागजातों में संबंधित योजनाओं को पूरा दिखाया गया है.
कार्यपालक अभियंताओं ने अपना लाभ देखा
पहले दी गयी योजना को पूरा किये बिना विभाग के कार्यपालक अभियंता अपने लाभ के लिए लगातार कई बार अग्रिम राशि दी हैं, जिससे इतनी बड़ी राशि लंबित पड़ी हुई है. अगर इइ योजना पूरी होने के बाद अग्रिम राशि देते, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती, लेकिन कई इइ ने मोटी रकम लेकर नियम विरुद्ध एसडीओ की जगह जूनियर इंजीनियर (जेई) तक को अग्रिम राशि दे दी है़ अधिकतर राशि जूनियर इंजीनियर के पास बकाया है.
अग्रिम राशि देने में नियमों की अनदेखी
नियम के अनुसार अग्रिम राशि पारित वाउचर के आलोक में सहायक अभियंता को देने का प्रावधान है. इसमें भी पहले दी गयी अग्रिम राशि का सामंजन होने के बाद ही दोबारा अग्रिम राशि देने का प्रावधान है. वहीं अग्रिम राशि जिस वित्तीय वर्ष में दी गयी है, उसी वित्तीय वर्ष में उसका समायोजन किया जाना है, जबकि गुमला में ऐसा नहीं किया गया है. अग्रिम राशि देने में नियमों की अनदेखी की गयी है.प्रस्तुत किया गया है
फरजी वाउचर
अभियंता विभाग द्वारा प्राप्त अग्रिम राशि को संबंधित योजनाओं में खर्च नहीं कर राशि को अपने व्यक्तिगत हित में खर्च किये हैं और अभी भी कर रहे हैं. दूसरी ओर अभियंता व्यक्तिगत हित में राशि को खर्च कर योजनाओं में खर्च दिखाने की षडयंत्र कर रहे हैं. वहीं कई योजनाओं का वाउचर व मस्टर रोल विभाग को प्रस्तुत किया गया है, जो कि फरजी है.
शंभु सिंह ने आरोप लगाया है कि फरवरी 2014 के पश्चात वर्तमान कार्यपालक अभियंता ने अभियंताओं से मोटी रकम लेकर स्थानांतरित अभियंताओं पर लंबित तकरीबन 150 लाख का सामंजन बैक डेट से फरजी विपत्रों के आधार पर किया है. इसकी जनहित में जांच होनी चाहिए.
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