गुमला जिले में पांच माह में 315 लोगों की मौत

Updated at : 18 Jul 2025 10:23 PM (IST)
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गुमला जिले में पांच माह में 315 लोगों की मौत

मोबाइल देखने से मना करने पर कम उम्र के बच्चे कर रहे हैं आत्महत्या

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गुमला. गुमला जिले में मौत के यह आंकड़ें जरूर भयावह लगेंगे. लेकिन यही हकीकत है. गुमला में आये दिन हादसे हो रहे हैं, जिससे लोगों की जानें जा रही हैं. बीते पांच माह जनवरी से लेकर मई माह तक की मौत के आंकड़ों पर गौर करें, तो 315 लोगों की मौत हो चुकी है. इसमें सड़क हादसों में सबसे अधिक 136 लोगों की जान गयी है. सड़क हादसे लोगों को डरा रहे हैं. लेकिन गाड़ियों की रफ्तार से आये दिन हादसे हो रहे हैं. इसमें अधिकांश युवाओं की जान जा रही है. सड़क हादसे में मौत का एक प्रमुख कारण हेलमेट नहीं पहनना है. बाइक सवार बिना हेलमेट पहने तेजी से बाइक चलाते हैं, जिससे हर एक-दो दिन के अंदर हादसे हो रहे हैं और मौतें हो रही हैं. इन पांच माह में 25 लोगों की हत्या हुई है. हालांकि हत्या के केस में कमी आयी है. लेकिन सड़क हादसे, आत्महत्या, पानी में डूब कर मरने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं.

आत्महत्या ने बढ़ायी चिंता

गुमला जिले में आत्महत्या ने चिंता बढ़ा दी है. पांच माह के अंदर 67 लोगों ने फांसी लगा कर या जहर खाकर अपनी जान दी है, जिसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं. कम उम्र के बच्चों द्वारा आत्महत्या करने से सवाल खड़ा हो गया है कि कम उम्र के बच्चों को आत्महत्या करने से कैसे रोका जाये. आत्महत्या करने वाले कई बीमार लोग भी हैं. बीमारी से परेशान होकर अपनी जान दिये हैं. वहीं कई ऐसे युवक-युवती हैं, जो प्रेम-प्रसंग में जान दे रहे हैं. वहीं स्कूल व कॉलेज के छात्र मोबाइल व बाइक की चक्कर में जान दे रहे हैं. कई ऐसे केस आये हैं, जिसमें मोबाइल देखने से मना करने पर बच्चों ने आत्महत्या कर ली.

वज्रपात व बिजली से भी जा रही हैं जान

गुमला में अब अलग-अलग तरीके से लोगों की मौत हो रही है. वज्रपात से भी लोग मर रहे हैं. पांच माह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार 12 लोगों की जान वज्रपात की चपेट में आने से हुई है. वहीं हाथी के हमले से पांच माह में सात लोगों की जान गयी है. जंगलों से गांव में घुसने वाले हाथी अब लोगों को निशाना बना रहे हैं. कई मामले में कुछ लोगों ने हाथी से अपनी जान बचायी. लेकिन सात लोगों को हाथी ने कुचल कर मार डाला. बिजली करंट से भी तीन लोगों की जान जा चुकी हैं. इधर, घरेलू समस्या, काम के दबाव समेत कई अन्य कारणों से दबाव में रहने वाले 17 लोगों की ह्रदय गति रुकने से जान जा चुकी है. गुमला सदर अस्पताल के डीएस डॉ अनुपम किशोर ने कहा है कि गुमला अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच माह में 315 लोगों की जान गयी हैं.

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