मॉब लीचिंग के आरोपियों को बचा रहा है प्रशासन : जेरोम जेराल्ड

Updated at : 01 Jun 2019 1:00 AM (IST)
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मॉब लीचिंग के आरोपियों को बचा रहा है प्रशासन : जेरोम जेराल्ड

डुमरी : जुरमू गांव में मॉब लीचिंग की घटना के खिलाफ शुक्रवार को डुमरी प्रखंड स्थित खेल मैदान में विरोध सभा का आयोजन किया गया. सभा में वक्ताओं ने कहा जुरमू गांव में मॉब लीचिंग घटना के आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस अविलंब हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार करें, नहीं […]

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डुमरी : जुरमू गांव में मॉब लीचिंग की घटना के खिलाफ शुक्रवार को डुमरी प्रखंड स्थित खेल मैदान में विरोध सभा का आयोजन किया गया. सभा में वक्ताओं ने कहा जुरमू गांव में मॉब लीचिंग घटना के आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस अविलंब हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार करें, नहीं तो इस आंदोलन को राज्य स्तरीय आंदोलन का रूप देकर आंदोलन किया जायेगा. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि घटना एक सोची समझी साजिश है, जिसमें आरोपियों को पुलिस प्रशासन बचाने का काम कर रही है.

एसपी से मिल कर केस हटाने की मांग की गयी. हत्यारों को पुलिस क्यों बचाना चाहती है. हिंदुत्व विचार लाने का प्रयास किया जा रहा है. हत्यारों को सजा दिलाने के लिए हजारों की संख्या में लोग आये हैं, जो आदिवासी एकजुटता है. यह एक अच्छी बात है. केंद्रीय जनसंघर्ष समिति के सचिव जेरोम जेराल्ड कुजूर ने कहा कि 10 अप्रैल को जिस तरह से जुरमू गांव में मॉब लीचिंग की घटना को एक समुदाय के लोगों ने अंजाम दिया है. उससे आदिवासी समाज बहुत आहत है.
उस घटना में चार लोगों के साथ मारपीट की गयी. उसके बाद पुलिस प्रशासन को घटना की जानकारी दी गयी. उसके बाद चारों घायलों को थाने के बाहर फेंक दिया गया. उसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा घायलों को समय पर उपचार के लिए सीएचसी डुमरी नहीं लाना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है. इसमें शामिल व्यक्तियों व प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
आज जो जनसैलाब उमड़ा है, इससे पता चलता है कि अगर दोषियों व लापरवाही बरतने वाले पुलिस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे लेकर जिला व राज्य पर स्तरीय आंदोलन किया जायेगा. उपसचिव सरोज हेमरोम ने घटना का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि मॉब लीचिंग मामले में झारखंड में 11 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है, जिसमें नौ मुसलिम व दो आदिवासी हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल लाया, जिसमें एक मृत था. उसका नाम रजिस्ट्रर में इंट्री करने के लिए डॉक्टर पर दबाव बनाया गया, फिर सभी को अचानक गुमला, फिर बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया.
उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल को एसपी से मुलाकात की गयी और एससी/एसटी केस बनाने की मांग की गयी. साथ ही मृतक के परिजनों को 15 लाख व घायलों को 10-10 लाख मुआवजा देने की मांग की गयी. मगर प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई. सभा को समाज सेवी अशोक वर्मा, जेम्स हेरेन, कांग्रेस नेत्री अमृता भगत, सुनील केरकेट्टा ने भी संबोधित किया.
इसके बाद सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने सरोज हेमरोम के नेतृत्व में बीडीओ से मिल कर छह सूत्री मांग पत्र सौंपा. मौके पर जयमंती बाड़ा, अनिल मनोहर रोष खाखा, सुशील कुमार टोप्पो, राजेश टोप्पो, सुरेंद्र सोरेन,अनुप टोप्पो, थदीयुस कुजूर, जुएल बाखला, जोवाकिम टोप्पो, गोपाल खाखा, अलोइस मिंज, दामोदर तुरी, स्टेन स्वामी, प्रमोद खलखो, एमेलियुस किस्पोट्टा, रोजालिया लकड़ा, प्रमुख जीवंती एक्का, जिप सदस्य निर्मला कुजूर सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे.
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