गुमला : आंगनबाड़ी केंद्र कभी भी हो सकता है ध्वस्त, 30 बच्चों की जान खतरे में

दुर्जय पासवान, गुमला सिसई प्रखंड के ऊपर सकरौली गांव का आंगनबाड़ी केंद्र कभी भी ध्वस्त हो सकता है. क्योंकि भवन के प्लास्टर टूट गया है. ढलाई किया हुआ छड़ दिखने लगा है. भवन के सामने का छत भी टेढ़ा हो गया है. इस जर्जर केंद्र के कारण 30 बच्चों की जान खतरे में है. कई […]
दुर्जय पासवान, गुमला
सिसई प्रखंड के ऊपर सकरौली गांव का आंगनबाड़ी केंद्र कभी भी ध्वस्त हो सकता है. क्योंकि भवन के प्लास्टर टूट गया है. ढलाई किया हुआ छड़ दिखने लगा है. भवन के सामने का छत भी टेढ़ा हो गया है. इस जर्जर केंद्र के कारण 30 बच्चों की जान खतरे में है. कई बार सेविका ने केंद्र की दुर्दशा की जानकारी समाज कल्याण विभाग को दी. लेकिन भवन की मरम्मत की दिशा में ठोस कदम उठाया नहीं गया है.
वर्तमान स्थिति यह है कि केंद्र धीरे-धीरे बेकार होने लगा है. हालांकि दो कमरे पूरी तरह बेकार हो गये हैं. जिसका उपयोग फिलहाल गांव के लोग पशुओं को बांधने में कर रहे हैं. एक कमरा ठीक था. परंतु वह भी गिरने की कगार पर है. इसलिए कुछ दिनों से सेविका सावित्री देवी बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठाकर बच्चों को पढ़ाती है.
बरसात के दिनों में बच्चों को पढ़ाने में परेशानी होगी. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि बीते 25 दिनों से केंद्र के बच्चों को अंडा व पोषाहार भी नहीं मिल रहा है. जबकि सेविका ने इसकी जानकारी प्रखंड प्रशासन को दी है. इसके बाद भी बच्चों को पोषाहार नहीं मिल रहा है. केंद्र के बगल में एक चापानल है. वह भी अबतक की स्थिति में है.
सेविका कहती है, अक्सर मैं अपने पैसे से चापानल मरम्मत करवाती हूं. उन्होंने प्रशासन से चापानल बनवाने की मांग की है. सेविका के अनुसार केंद्र में 39 बच्चों का नामांकन है. जिसमें मात्र 30 बच्चे हर रोज केंद्र आते हैं. उपमुखिया सुदामा उरांव ने कहा कि ऊपर सकरौली गांव के आंगनबाड़ी केंद्र की समस्या से प्रशासन को अवगत कराया गया है. परंतु प्रशासन इस गांव से मुंह मोड़े हुए हैं. भवन की जो स्थिति है. अगर जल्द मरम्मत नहीं हुई तो बच्चों के साथ हादसा होने का डर है.
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